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भारत का इतिहास पार्ट 2

प्राचीन भारतीय इतिहास का घटनाक्रम

प्रागैतिहासिक कालः 400000 ई.पू.-1000 ई.पू. : यह वह समय था जब सिर्फ भोजन इकट्ठा करने वाले मानव ने आग और पहिये की खोज की।

सिंधु घाटी सभ्यताः 2500 ई.पू.-1500 ई.पू. : इसका यह नाम सिंधु नदी से आया और यह कृषि करके उन्नत हुई। यहां के लोग प्राकृतिक संसाधनों की भी पूजा करते थे।

महाकाव्य युगः 1000 ई.पू.-600 ई.पू. : इस कालखण्ड में वेदों का संकलन हुआ और वर्णों के भेद हुए जैसे आर्य और दास।

हिंदू धर्म और परिवर्तनः 600 ई.पू.-322 ई.पू. : इस समय में जाति प्रथा बहुत सख्त हो गई थी और यही वह समय था जब महावीर और बुद्ध का आगमन हुआ और उन्होंने जातिवाद के खिलाफ बगावत की। इस काल में महाजनपदों का गठन हुआ और बिम्बिसार के शासन में मगध आया, अजात शत्रु, शिसुनंगा और नंदा राजवंश बने।

मौर्य कालः 322 ई.पू.-185 ई.पू. : चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित इस साम्राज्य के तहत् पूरा उत्तर भारत था और बिंदुसारा ने इसे और बढ़ाया। इस काल में हुए कलिंग युद्ध के बाद राजा अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया।

आक्रमणः 185 ई.पू.-320 ईसवीः इस अवधि में बक्ट्रियन, पार्थियन, शक और कुषाण के आक्रमण हुए। व्यापार के लिए मध्य एशिया खुला, सोने के सिक्कों का चलन और साका युग का प्रारंभ हुआ।

डेक्कन और दक्षिणः 65 ई.पू.-250 ईसवीः इस काल में दक्षिण भाग पर चोल, चेर और पांड्या का शासन रहा और इसी समय में अजंता एलोरा गुफाओं का निर्माण हुआ, संगम साहित्य और भारत में ईसाई धर्म का आगमन हुआ।

गुप्त साम्राज्यः 320 ईसवी-520 ईसवीः इस काल में चन्द्रगुप्त प्रथम ने गुप्त साम्राज्य की स्थापना की, उत्तर भारत में शास्त्रीय युग का आगमन हुआ, समुद्रगुप्त ने अपने राजवंश का विस्तार किया और चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शाक के विरुद्ध युद्ध किया। इस युग में ही शाकुंतलम और कामसूत्र की रचना हुई। आर्यभट्ट ने खगोल विज्ञान में अद्भुत कार्य किए और भक्ति पंथ भी इस समय उभरा।

छोटे राज्यों का कालः 500 ईसवी-606 ईसवीः इस युग में हूणों के उत्तर भारत में आने से मध्य एशिया और ईरान में पलायन देखा गया।

उत्तर में कई राजवंशों के परस्पर युद्ध करने से बहुत से छोटे राज्यों का निर्माण हुआ।

हर्षवर्धनः 606 ई-647 ईसवीः हर्षवर्धन के शासनकाल में प्रसिद्ध चीनी यात्री हेन त्सांग ने भारत की यात्रा की। हूणों के हमले से हर्षवर्धन का राज्य कई छोटे राज्यों में बँट गया।

यह वह समय था जब डेक्कन और दक्षिण बहुत शक्तिशाली बन गए।

दक्षिण राजवंशः 500ई-750 ईसवीः इस दौर में चालुक्य, पल्लव और पंड्या साम्राज्य पनपा और पारसी भारत आए।

चोल साम्राज्यः 9वीं सदी ई-13वीं सदी ईसवीः विजयालस द्वारा स्थापित चोल साम्राज्य ने समुद्र नीति अपनाई।

अब मंदिर सांस्कृतिक और सामाजिक केन्द्र होने लगे और द्रविडि़यन भाषा फलीफूली।

उत्तरी साम्राज्यः 750ई-1206 ईसवीः इस समय राष्ट्रकूट ताकतवर हुआ, प्रतिहार ने अवंति और पलस ने बंगाल पर शासन किसा। इस दौर ने राजपूत कुलों का उदय देखा।

खजुराहो, कांचीपुरम, पुरी में मंदिरों का निर्माण हुआ और लघु चित्रकारी शुरु हुई। इस अवधि में तुर्कों का आक्रमण हुआ।

मध्यकालीन भारतीय इतिहास

मुगल साम्राज्यः फरगाना वैलर जो कि आज का उज़बेकिस्तान है, के तैमूर और चंगेज़ खान के वंशज बाबर ने सन् 1526 में खैबर दर्रे को पार किया और वहां मुगल साम्राज्य की स्थापना की, जहां आज अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश है। सन् 1600 तक मुगल वंश ने ज्यादातर भारतीय उपमहाद्वीप पर राज किया। सन् 1700 के बाद इस वंश का पतन होने लगा और आखिरकार भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम के समय सन् 1857 में पूरी तरह खात्मा हो गया।

आधुनिक भारतीय इतिहास

उपनिवेशी कालः16वीं सदी में पुर्तगाल, नीदरलैंड, फ्रांस और ब्रिटेन से यूरोपीय शक्तियों ने भारत में अपने व्यापार केन्द्र स्थापित किए। बाद में आंतरिक मतभेदों का फायदा उठाकर उन्होंने अपनी काॅलोनियां स्थापित कर लीं।

ब्रिटिश राजः
सन् 1600 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत आने पर यहां महारानी विक्टोरिया के शासन का ब्रिटिश राज शरु हुआ। यह सन् 1857 में भारत की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के बाद समाप्त हुआ।

सन् 1857 के प्रसिद्ध व्यक्तिः

बहादुर शाह ज़फर
अधिकांश भारतीय विद्रोहियों ने बहादुर शाह ज़फर को भारत का राजा चुना और उनके अधीन वे एकजुट हो गए। अंग्रेजों की साजिश के सामने वो भी नहीं टिक पाए। उनके पतन से भारत में तीन सदी से ज्यादा पुराने मुगल शासन का अंत हो गया।

बख्त खानः
ईस्ट इंडिया कंपनी में सूबेदार रहे बख्त खान ने रोहिल्ला सिपाहियों की एक सेना का निर्माण किया। मई 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ मेरठ में सिपाहियों के विद्रोह करने के बाद वो दिल्ली में सिपाही सेना का कमांडर बन गए।

मंगल पांडेः
34वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री का हिस्सा रहे मंगल पांडे को 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में एक वरिष्ठ अंग्रेज अधिकारी पर हमला करने के लिए जाना जाता है। इस घटना को ही भारत की स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत माना जाता है।

नाना साहिबः निर्वासित मराठा पेशवा बाजी राव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहिब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया था।

रानी लक्ष्मीबाईः
रानी लक्ष्मीबाई तात्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेज सैनिकों के खिलाफ बहादुरी से लड़ीं। 17 जून 1858 को ग्वालियर के फूल बाग इलाके के पास अंग्रेजों से लड़ते हुए उन्होंने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।

तात्या टोपेः
नाना साहिब के करीबी सहयोगी और सेनापति तात्या टोपे ने रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी।

वीर कुंवर सिंहः
वर्तमान में बिहार के भोजपुर जिले का हिस्सा रहे जगदीशपुर के राजा ने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र सेना का नेतृत्व किया।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधीः
20वीं सदी में महात्मा गांधी ने लाखों लोगों का नेतृत्व किया और सन् 1947 में स्वतंत्रता हेतु एक अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया।

आजादी और विभाजनः
अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति के कारण पिछले कुछ सालों में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच धार्मिक तनाव बढ़ता गया खासतौर पर पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे प्रांतों में। महात्मा गांधी ने दोनों धार्मिक समुदायों से एकता बनाए रखने की भी अपील की। दूसरे विश्व युद्ध के बाद कमजोर अर्थव्यवस्था से जूझ रहे अंग्रेजों ने भारत छोड़ने का फैसला किया, जिससे अंतरिम सरकार बनाने का रास्ता बना। आखिरकार, भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ और अंग्रेजों के कब्जे से इस क्षेत्र को सन् 1947 में आजादी मिली।

आजादी के बाद के कालः
कई सभ्यताओं जैसे ग्रीक, रोमन और मिस्त्र ने उदय और पतन देखा। भारतीय सभ्यता और संस्कृति इससे अछूती रही। इस देश पर एक के बाद एक कई आक्रमण हुए, कई साम्राज्य आए और अलग अलग हिस्सों पर शासन किया, लेकिन भारतवर्ष की अदम्य आत्मा पराजित नहीं हुई।

आज भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे जीवंत गणराज्य के तौर पर विश्व में देखा जाता है। यह एक उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति और दक्षिण एशिया का एक प्रभावशाली देश है।

भारत एशिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है और दुनिया का सातवां सबसे बड़ा और जनसंख्या के तौर पर दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसमें एशिया का एक तिहाई हिस्सा है और मानव जाति का सातवां भाग इसमें है।

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