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फिर से दिल्ली खाली, संकट में व्यापारी और शिक्षा

सत्यम् लाइव, 7 जनवरी 2022, दिल्ली।। राजधानी दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू का एलान होते ही फिर से दिल्ली की लेवर शुक्रवार सुबह से अपने अपने घर जाने का तैयार हो चुकी है। अधिकांशतर कारीगर के मुख से ये सुनाई दे रहा है कि यदि इस बार लॉकडाउन लगा तो फिर अपने गृह जनपद पर ही कुछ काम करेगें और वापस नहीं आयेगें क्योंकि दिल्ली में कमाई होती नहीं जबकि मकान मालिक किराया छोड़ता नहीं है। ऐसे में न घर के रहते हैं न घाट के। साथ ही बढ़ती पाबांदियों से व्यापारी भी तरह तरह की बाते करता हुआ नजर आने लगा है। कुछ व्यापारी तो इस तरह की पाबंदियों का विरोध तक कर रहे हैं परन्तु अभी वो दबी जवान सेये कहते हुए नजर आये कि भारतीय धरा पर वायरस वो भी सूर्य की प्रचण्ड गर्मी के सामने लाकर ये सब अपनी कमाई कर रहे हैं वो भी विदेशी कम्पनियों को आगे बढ़ा रहे हैं।

बाजार में होटल से लेकर रेहड़ी वाला तक के मुख से एक ही बात सुनाई दे रही है कि ये सब हमारा व्यापार बन्द कराने के लिये कार्य कर रहे हैं। दिल्ली के शिक्षा व्यवस्था को लेकर जब प्राइवेट स्कूल वालों से मिले तो उनके मुख से जो शब्द निकले उससे साफ नजर आ रहा है कि वो भी नाराज हैं। कुछ स्कूल वालों ने यहॉ तक कहा कि इन्टरनेशनल शिक्षा व्यवस्था कभी भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था से अच्छी नहीं हो सकती परन्तु सभी इन्टरनेशनल शिक्षा व्यवस्था को भारत में फैला रहे हैं और ऑनलाइन के माध्यम से बच्चों का भविष्य खराब करने जा रहे हैं जबकि सभी को पता है कि मोबाईल से बच्चों की ऑखें और याददास्त कमजोर हो रही है साथ ही मानसिक विकास की जगह, मानसिक बीमारी पैदा हो रही है। बड़ी बड़ी कम्पनियों को नीजिकरण के नाम पर दिल्ली सरकार को भी काम करते हुए कहते हुए एक स्कूल के मालिक ने तो यहॉ तक कह डाला कि स्कूल से वायरस फैल रहा है और शराब की दुकान से वायरस समाप्त हो रहा है। पूरे समाज को सारी ही सरकारें शराबी बनाने जा रही हैं और हर तरफ से मात्र पैसा कमाने के लिये कार्य कर रही हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था चरमराती हुई पूर्ण रूप से नजर आ रही है और इसका कारण ही गंदी राजनीति है।

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सुनील शुक्ल

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