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विश्वास जमाकर की धोखाधड़ी : दिल्ली पुलिस में कई बार शिकायत देने के बावजूद भी नहीं हुआ मुकदमा दर्ज !

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11 सालो से दिल्ली पुलिस में कई बार शिकयत देने के बावजूद भी नहीं हुआ मुकदमा दर्ज | पीड़ित ने मांगी सपरिवार आत्मदाह करने की अनुमति !

सत्यम् लाइव, 27 मार्च 2022, दिल्ली।। एक धोखाधड़ी का मामला जो लगभग 11 वर्ष पुराना और करोल बाग इलाके का है जिसमे पीड़ित न्याय की तलाश में पिछले 11 सालो से थाने दर थाने, ए. सी. पी दफ्तर और डी. सी. पी दफ्तर ओर साथ ही इलाके के कमिश्नर दफ्तर तक के चककर काट रहा है पर 2011 से अब तक उसकी किसी चौकी तक में FIR तक नहीं लिखी गई | न्याय की बात तो दूर रही, दिल्ली पुलिस की यह कार्य प्राणाली और न्याय प्राणाली पर आज भी दिल्ली पुलिस पर सवालिया निशान पैदा करती है|

पीड़ित संजय खंडेलवाल के अनुसार: पीड़ित संजय खंडेलवाल जो अपने पुरे परिवार के साथ करोल बाग के देव नगर इलाके में रहता हैं। उसका सोने के जेवर बनाने का पुराना कारोबार था। वह आर्डर पर सोने के जेवर कारीगरों से बनवाते थे। पीड़ित संजय खंडेलवाल ने अशोक गुलाटी और उसके पुत्र गौतम गुलाटी पर आरोप लगाया कि इन दोनों ने मिलकर लगभग 6370.180Gm सोने के जेवरात बनवाए और उन्हें इसकी एवज में भुगतान नहीं किया और जिस दुकान का पता उसने कुचा महाजनी में बताया था ये लोग वह दुकान बंद करके भी फरार हो गये।

पीड़ित संजय खंडेलवाल ने इस बाबत 29/3/2011 लिखित शिकायत डी. सी. पी. दरियागंज को दी और थाने के कई चक्कर काटे परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान पीड़ित को जानकारी हुई कि अशोक गुलाटी और गौतम गुलाटी द्वारका में रह रहे हैं। संजय खंडेलवाल ने वहां जाकर अशोक गुलाटी से संपर्क किया और उसे पैसे लौटाने का अनुरोध किया और इस बात की सबूत के तौर पर वीडियो बना ली जिसमें की अशोक गुलाटी पैसे देने वाली बात स्वीकार कर रहा है। उस समय अशोक गुलाटी ने एक पर्ची भी बनाकर दी थी जिसमें की उसने जेवर का वजन और भुगतान की राशि लिखा है।

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अशोक गुलाटी ने संजय खंडेलवाल को अपना नया फोन नंबर दिया और आश्वासन दिया कि जल्दी ही वह रकम लौटा देगा लेकिन कुछ दिनों बाद से उसने पीड़ित का फोन उठाना भी बंद कर दिया। इस पर पीड़ित ने 23 जनवरी 2017 को ए सी पी को पुनः लिखित शिकायत दर्ज कराई परंतु यहाँ भी नतीजा कुछ नहीं निकला। पीड़ित संजय खंडेलवाल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना महोदय के कार्यालय को भी लिखित शिकायत दिनांक 7/2/2022 को दी तथा न्याय की गुहार लगाई और आशा की की इस बार न्याय जरूर मिलेगा और विश्वास जताया की दिल्ली पुलिस कमिश्नर इस शिकायत का संज्ञान जरूर लेंगे और अशोक गुलाटी और गौतम गुलाटी पर मुकदमा दर्ज करेंगे।

संजय खंडेलवाल के अनुसार बकायेदारों को भुगतान करने की एवज में उन्होने दुकान तक बेच डाली। अब स्थिति बहुत दयनीय हो गई है। लेकिन देनदारी अभी भी बहुत बाकि है और ये रकम कहां से भुगतान करेंगे यह समझ से बाहर है। पीड़ित अब रोड पर आ गए हैं और उनकी पत्नी को केंसर है जिसके इलाज के लिये भी पैसा नहीं है। पीड़ित ने शिकायत मध्य जिला के डी.सी.पी को दिनांक 9/2/22 को तथा थाना प्रसाद नगर में दिनांक 9/2/22 को शिकायत दी। फिर जब किसी पुलिस अधिकारी ने संपर्क नहीं किया तो दिनांक15 फरवरी 2022 को दिल्ली पुलिस को ट्वीट किया जिसके तुरंत बाद जांच अधिकारी ने तुरंत फोन करके अगले दिन पीड़ित को थाने बुलवाया।

पीड़ित को एक बार फिर उम्मीद की कुछ किरण दिखी परंतु इस बार भी कुछ कार्रवाई नहीं हुई तो करोल बाग के ए. सी. पी. से दिनांक 2 मार्च 2022 को अपनी धर्म पत्नी के साथ मुलाकात की उन्होंने तत्काल थाना अध्यक्ष प्रसाद नगर से बात की तथा उनसे मिलने के लिए बोला। एस. एच. ओ. साहब नें कहा कि शिकायत का पूरा ब्यौरा दीजिए जो कि पीड़ित ने लिखित रूप में उन्हें 7 मार्च 2022 को उनके कहने पर जांच अधिकारी को सौंप दिया। परंतु उसके बाद भी आज तक कुछ कार्यवाही नहीं हुई।

अब पीड़ित संजय खंडेलवाल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर व प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है कि वह अपने परिवार के साथ सामूहिक आत्मदाह करना चाहते हैं इसके लिए उन्हें परमिशन दी जाए क्योंकि उनके पास अब आत्मदाह करने के आलावा ओर कोई रास्ता नहीं बचा है जिस तरीके से पीड़ित संजय खंडेलवाल को दिल्ली पुलिस व प्रशासन की तरफ से निराशा हाथ लगी है ! जीने का कोई मकसद नहीं रहा ! अब सवाल यह उठता है कि क्या न्याय पालिका किसी पीड़ित की मदद नहीं कर सकती ? दिल्ली पुलिस अधिकारी क्यों चुप्पी साधे बैठे हैं ? कम से कम FIR दर्ज कर तहकीकात तो कर सकती है |

जब पीड़ित नें दिल्ली पुलिस को ट्वीट किया उसके बाद भी पुलिस ने संज्ञान क्यों नहीं लिया ? क्या पुलिस यह चाहती है कि यह परिवार आत्मदाह कर ले ! दिल्ली पुलिस की छवि पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है ! खबर लिखे जाने तक भी किसी पुलिस अधिकारी या प्रसासन की तरह से कोई संपर्क नहीं किया गया।

संवाददाता – मनोज सिंह

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