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भगवान करे! ‘‘ब्लैक हंस’’ अर्थात् व्यापक मन्दी का कथन गलत सिद्ध हो।

सत्यम् लाइव, 24 जून, 2022, दिल्ली।। आरबीआई की मीटिंग में शमिल सभी अधिकारियों का कथन गलत हो जाये मेरी भी अधिकारियों की तरह ईश्वर से यही प्रार्थना है कि ‘‘ब्लैक हंस’’ कहा जाने वाला समय कभी न आये इसी कामना के साथ मैं अपना प्रस्ताव इस विषय पर रखूॅ तो इतना अवश्य कहूँगा कि यदि ‘‘ब्लैक हंस’’ अर्थात् व्यापक आर्थिक मन्दी का दौर आता है तो पुनः भारतीय को चरखे से आजादी आती है ये सिद्ध करना पड़ेगा और यह भारतीय शास्त्रों से धर्म के सिद्धान्त को समझे बिना ये सिद्ध नहीं होगा। 

संस्कार, वैदिक गणित का एक हिस्सा है और वैदिक गणित, धर्म के अनुसार ब्रह्माण्ड की गणना अर्थात् संस्कार करने को कहते हैं अर्थात् गणना करने से ही समस्त कष्टों का निवारण किया जा सकता है। इसी कारण से धर्म एक है और धर्म निरपेक्ष जैसा शब्द महामूर्खो की देन है और महामूर्खा ने ही इस शब्द का समाज में प्रचार और प्रसार किया है अतः धर्म का ज्ञान परमावश्यक है।

अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये यदि भारत को भारतीयता के आधार पर खड़ा करना है तो सबसे पहले हर भारतीय को अपने घर के अन्दर से उत्पाद स्वयं बनाने होगें। वो भी बाजार के लिये नहीं बल्कि स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये। वैदिक नारी तैयार करनी होगी। वैदिक नारी का अर्थ होता है ‘‘आहार भेषज’’ तैयार करना। अपनी रसोई से रसों का निर्माण कराना होगा और अपने परिवार को भोजन से स्वस्थ रखने की कला पुनः जागृत करनी होगी। आध्ुनिकता के आवरण को किनारे करके स्वयं को भारतीय भूमि का ज्ञान प्राप्त कराना होगा।

जरा चीन पर नजर डालते हैं कि यूॅ अव्वल है कारण है हम सबको जन्म के साथ ही बताया कि जनसंख्या ज्यादा होने के कारण हम परेशान हैं जबकि चीन ने ज्यादा जनसंख्या को अपनी ताकत बनाया। उसने अपने हर हाथों को काम सीखाया और डब्लूटीओ पर चीन ने हस्ताक्षर तब किया जब उसने हर हाथ को मजबूत बना दिया। हस्ताक्षर करते ही उसने भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपना मॉल फैला दिया।

जबकि डब्लूटीओ पर हस्ताक्षर के बाद भारतवासियों को, विदेशी मॉल ब्राण्ड के नाम से बताया गया। उनका मॉल बहुत क्वालिटी वाला है। ये समझाया गया। ये कार्य किया फिल्मी कलाकारों, क्रिकेटर तथा अन्य जानी मानी हस्तियों ने कुछ रूपया कमाने के चक्कर में किया। जब विदेश की बात चली तो चीन को दोषी बताया गया परन्तु उसके अलावा अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया, जापान सभी ने भारत को अपनी बाजार बना लिया। चीन में प्रवेश नहीं कर सकते थे क्योंकि हर घर में उत्पादन हो रहा था। बस यही हमारी बाजार पर कब्जा का मुख्य कारण है आज भारतीय बाजार अमेरिका पर निर्भर है जबकि चीन अपनी बाजार को स्वयं सजा रहा है।

सुनील शुक्ल

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