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कानून के आधार पर वेश्यावृत्ति वैध घोषित

सत्यम् लाइव, 27 मई 2022 दिल्ली।। धर्म के चार चरणों में कलयुग में एक मात्र चरण शेष रह जाता है और वो चरण है दान। आज दान करने से पहले आपको परखना पड़ता है कि दान लेने वाला पात्र ठीक है या फिर मधुशाला में जाकर वो अधर्म के मार्ग पर आपके दान को उड़ा देगा और ज्यादा खतरनाक स्थिति सामने तब सामने आती है जब सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति को वैध घोषित कर दिया। और स्पष्ट करते हुए कहा कि पुलिस दखलंदाजी नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट के जज एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली तीन सदस्सीय पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया। साथ ही छः दिशानिर्देश भी जारी किये हैं साथ ही 27 जुलाई को इन सिफारिशों की सुनवाई तय की जायेगी। केन्द्र को जवाब देने की अधिकार है

सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यालय चलाना गैरकाननी बताया साथ ही स्वैच्छिक वेश्यावृत्ति को वैध बताया। साथ ही ये भी कहा कि यदि अपराध होता है तो तत्काल चिकित्सा और कानूनी मदद से उसको सुविधा प्रदान की जायें। पुलिस को ये भी आदेश किया कि सेक्स वर्करों के प्रति क्रूर और हिन्सक रवैया की मान्यता नहीं है। मीडिया को भी नसीहत देते हुए कहा कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार, छापेमारी और बचाब अभियान के दौरान सेक्स वर्करों की पहचान उजागर नहीं करें। चाहे वो आरोपी ही क्यों न हो।

छह सूत्रीय दिशानिर्देश जो जारी किये गये है वो इस तरह से हैं

1- सेक्स वर्कर या यौनकर्मी कानून के तहत समान संरक्षण के पात्र हैं। आपराधिक कानून सभी मामलों में उम्र और सहमति के आधार पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
2- जब यह स्पष्ट हो जाए कि यौनकर्मी वयस्क है और सहमति से इस पेशे में भाग ले रही है तो पुलिस को हस्तक्षेप या कार्रवाई से बचना चाहिए।
3- देश के प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानजनक जीवन का अधिकार है।
4- सेक्स वर्करों को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए और न ही दंडित किया जाना चाहिए।
5- वेश्यालयों पर छापा मारते वक्त उनका उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।
6- सेक्स वर्कर के बच्चे को सिर्फ इस आधार पर मां से अलग नहीं किया जाना चाहिए कि वह देह व्यापार में है। मानवीय शालीनता और गरिमा की बुनियादी सुरक्षा सेक्स वर्करों और उनके बच्चों के लिए भी है। यदि कोई नाबालिग बच्चा वेश्यालय में सेक्स वर्कर के साथ रहता या रहती है तो यह नहीं माना जाए कि वह तस्करी कर यहां लाया गया है।

सुनील शुक्ल

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