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भारतीय शास्त्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य का मुद्दा

सत्यम् लाइव, 6 जनवरी, 2022, दिल्ली।। भारत के कई राज्यों में चुनावी दौर चल रहा है और चुनाव में कुर्सी पाने के लिये जनता से कुछ न कुछ दावे किये जाते हैं। सारे ही पार्टियों के पास एक मुद्दा अवश्य पूरा करती है और वो है विदेशी पार्टी की मजाक उड़ाना और मीडिया इसे जमकर प्रचार भी करता है क्योंकि मीडिया भी किसी न किसी पार्टी के साथ होता है। अब तक चुनाव में गड्ढा मुक्त सड़के, 24 घण्टे पानी, 24 घण्टे लाइट, जाम से मुक्ति जैसी समस्याओं के वादे किये जाते थे फिर 2014 के चुनाव आते आते मुद्दा बदला और स्वदेशी सहित काले धन का मुद्दा ने जन्म लिया और इस मुद्दे पर जनता ने पूर्ण बहुमत दिलाया परन्तु हुआ क्या? खुलेआम कुर्सी पाने वालों ने कहा कि वो तो चुनावी मुद्दा था। अर्थात् पूर्ण नहीं किया जाता।

इस चुनाव में दूसरी पार्टी की बुराई के साथ नये मुद्दे ने जन्म लिया है वो है शिक्षा और स्वास्थ्य का मुद्दा। शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्याओं के निदान हेतु ही भारतीय शास्त्र भरा पड़ा है। हम सब जानते हैं कि गुरूकुल की व्यवस्था को समाप्त 1858 में मैकाले शिक्षा पद्वति के नाम पर किया गया और इसी शिक्षा को समाप्त कराकर आज भी हमें अस्वस्थ बनाया जा रहा है। इस बात को महर्षि राजीव दीक्षित जी ने खुलकर कहा और शिक्षा के बदलवा कराने में जो राजाराम मोहन राय अंग्रेजों का साथ दिया उस पर पूरा व्याख्यान दिया जो आज भी नेट पर उपलब्ध है। उस शिक्षा पर बिना कोई कार्य आगे बढ़ाये मैकाले शिक्षा पद्वति को आगे बढ़ाया जा रहा है और इंटरनेशनल बोर्ड की पढ़ाई भारत में प्रारम्भ कराई जा रही है। जबकि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में जो आगे बढ़कर मैनें अब तक जानकारी ली उससे ये ज्ञात होता है कि यदि कई जन्म इंटरनेशनल बोर्ड वाले लगे रहेगें तब भी वो अध्यात्म विज्ञान को गलत साबित नहीं कर पायेगें। मैं अपने ग्रन्थों की ताकत पर कह रहा हॅू कि मैकाले शिक्षा के तहत् पर आज उपभोगवादी विज्ञान का प्रचार करके, नोट गिनने वाली गणित पढ़ाई जा रही हैं और इस विज्ञान के तहत् भारतीय धरा की शिक्षा में परिग्रही पढ़ाया जा रहा है। आज किसी भी अपरिग्रही अधिकारी या सन्त के दर्शन मिल जायें तो आप समझ लेना कि आपको कई जन्मों के पुण्य प्राप्त हो गया।

आचार्य चाणक्य का कथन था कि ‘‘आप शास्त्रों की रक्षा करो शास्त्र आपकी रक्षा करेगे।’’ इसका अर्थ है कि भारतीय शास्त्रों से वैदिक गणित के उस अंश को समझो और अपनी प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करो। जिससे यह प्रकृति और पर्यावरण आपकी रक्षा करें। इसी वाक्यों को मैं अपने शब्दों में लिखता हूॅ कि ‘‘काल के जानकार की रक्षा स्वयं महाकाल करते हैं।’’ आज हम सबको भारतीयता के आधार से हटाकर वो गणित और विज्ञान पढ़ाया जा रहा है जिससे विदेशी अर्थव्यवस्था पहले मजबूत होती है और शेष जो बचता है वो आपको मिल जाता है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था का ज्ञान पाते हुए मैनें देखा कि स्वास्थ्य पर वो ज्ञान भारतीय साहित्य में है कि आप अपने भोजन को सात्विकता के आधार पर समझें तो पूरे जीवन आपको किसी भी अस्पताल की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और न ही किसी औषधि की। इसी काल के ज्ञान की बात मैं कर रहा हूॅ और महर्षि राजीव दीक्षित के बताये गये मार्ग का ज्ञान पाकर आप स्वयं को इतना स्वस्थ रख सकते इसका माध्यम शिक्षा है जिसको कोई भी सत्ताधारी लागू नहीं करेगा।

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सुनील शुक्ल



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