बांद्रा स्‍टेशन पर हजारों प्रवासी घर जाने को परेशान, पुलिस का लाठीचार्ज

लाॅॅॅकडाउन के दौरान आज दोपहर बाद हजारों लोग घर जाने को बेताब बांद्रा स्‍टेशन पर आ पहुॅचे।

सत्‍यम् लाइव, 14 अप्रैल 2020 आज दोपहर बाद से ही लॉकडाउन को और बढी की खबर अब मजदूरों को पता चलते ही बांंद्रा स्‍टेशन पर अपने घर जाने के हजारों की संख्‍या में लोग आ गये। लॉकडाउन की परवाह किये बिना ही अब घर जाने को परेशान जनता बहुत बडी संख्‍या में स्‍टेशन पर दिखते ही पुलिस ने अपनेे हाथ में चार्ज ले लिया। आज प्रात:काल ही प्रधानमंत्री जी ने लॉकडाउन को 3 मई तक और बढा दिया हैै चारों तरफ से खबर आ रही है कि मजदूर वर्ग अपने भोजन को लेकर परेशान है। अपनी कोशिश में सरकार भोजन की व्‍यवस्‍था कर रही है। परन्‍तुु अब कोई भी राज्‍य की सरकार को येे नहीं ज्ञात कर पायी है कि उसके राज्‍य में कितना मजदूर रूका हुआ है अचानक चार घंटे के अन्‍दर किया गया लॉकडाउन से सबसे ज्‍यादा परेशान वो गरीब आदमी ही है जो लगभग भारत में इस समय 25 प्रतिशत के लगभग है। आप सोचो कि कुल जनसंख्‍या के 25 प्रतिशत व्‍यक्तियों काेे भोजन करा पाना वो भी जब आपको ज्ञात ही न हो कि कहॉ पर है तो आप भला कैसे उसे भोजन करा सकते हो। बात दिल्‍ली की हो या मुम्‍बई की। सरकार ने तो ऑन लाइन रजिस्‍ट्रेशन कराने के लिये कह दिया है क्‍या उसके पास ऑन लाइन मोबाईल सुविधा उपलब्‍ध है ? उस मजदूर को क्‍या रजिस्‍ट्रेशन करना आता है ? आप कह सकते हो कि दूसरे से करा ले, उस गरीब का बाहर पुलिस ऐसा स्‍वागत करती है ऐसा लगता है कि कन्‍नौज विधायक का बदला ले रही हो।यही फिर मुम्‍बई पुलिस ने आज किया है भीड को तितर बितर करने के लिये लाठी चार्ज किया। साथ ही AIMIM के नेता वारिस पठान नेे इस घटना पर ट्वीट मेंं लिखा ”लॉकडाउन बढने पर प्रवासी मजदरों ने मुम्‍बई के बांद्रा में प्रदर्शन के दौरान घर वापस भेजा जाने का नारा लगा र‍हे थे।

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दूसरी तरफ महाराष्‍ट्र सरकार मुख्‍यमंंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे तथा मंंत्री आदित्‍य ठाकरे ने ट्वीट करके कहा कि ‘बांद्रा स्‍टेशन की मौजूदा स्थिति तथा सूरत का दंगा ये सब केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रवासी को घर न भेज पाने की विफलता का कारण है।

नोवेल कोरोना जैसी बडी महामारी को रोकने के लिये लॉकडाउन आवश्‍यक है। ये स्थितियॉ भयावह नोवेल कोरोना से भी ज्‍यादा हो सकती हैंं इस पर निष्‍पक्षता के साथ निर्णय हम लोगों को ही करना पडेगा। भारत की परिस्थिति क्‍या है ? सूर्य के ताप को देखते हुए। हमें सच में दूसरे की तरफ देखने की आदत सी बन गयी हैं। गरीबी का ये आलम है कि दिल्‍ली में कई जगह ऐसे गरीब फंसे हुए हैं जिन्‍हें 5 दिनों से भोजन नसीब नहीं हुआ है वो स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब कोई 8 दिन पहले मॉ बनी हो और उसेे अपना मासूम को पालन हो और मॉ के ऑचल में दूध न हो। सोचो जरा क्‍या स्थिति होगी उसी महिला की। सिर्फ अपनी किस्‍मत को दोष देने के अलावा क्‍या कर सकती है ? परन्‍तु ये सच है कि दोषी हम सब है अपनी शास्‍त्रों को भूलाकर उसे इस स्थिति में ले आये हैं।

उपसम्‍पादक सुनील शुक्‍ल

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