मूसलाधार बारिश के कारण पवित्र नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे प्रमुख घाट, मंदिर, बाजार और मुख्य सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और कई इलाकों में दुकानों व मकानों में पानी भर जाने से लोग फंस गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर राहत और बचाव अभियानों को और तेज़ करने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत और आर्थिक सहायता के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सतना कलेक्टर को सख्त निर्देश दिए हैं कि चित्रकूट में फंसे श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए भोजन, वस्त्र तथा शुद्ध पेयजल की तत्काल और समुचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वे कराकर आरबीसी 6/4 (RBC 6/4) के तहत प्रभावितों को राहत राशि वितरित की जाए। इसके अलावा, जिन जिलों में बारिश का असर कम है, वहां से आपदा राहत उपकरण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजने तथा एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को मुस्तैदी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के आदेश दिए गए हैं।
हेलीकॉप्टर से चित्रकूट पहुंचेंगे मुख्यमंत्री, सतना-यूपी मार्ग कटा
मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए हेलीकॉप्टर से चित्रकूट स्थित आरोग्यधाम हेलीपैड पहुंचेंगे। वे प्राचीन मुखारबिंद के पास बने आश्रय स्थलों में जाकर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात करेंगे और राहत सामग्री का वितरण करेंगे। प्रशासन ने बताया कि जैतवारा गांव और सद्गुरु आश्रम में रुके श्रद्धालुओं के परिजनों से उनका संपर्क कराया जा रहा है। इस बीच, राजोला बाईपास के पास हनुमान धारा मार्ग पर स्थित पुल के डूब जाने से सतना-चित्रकूट मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच का सीधा संपर्क टूट गया है।

























