सत्यम् लाइव, 30 अगस्त 2021, दिल्ली।। डेंगू और चिकन गुनिया एक संक्रमण रोग है जो एक मच्छर के काटने के कारण होता है इस संक्रमण में बुख़ार आता है जो ‘शरीर के जोडों में दर्द कर देता है। लक्षणों में बुखार, त्वचा पर लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द होता है। प्लेटलेटस् वैसे तो बुखार आते ही कम होते ही हैं परन्तु इसमें तेजी से कम होते हैं। माना जाता है कि डिंगा शब्द से डेंगू बना है। स्पेन में डिंगा का अर्थ है सावधान। कुछ लोगों का मानना है कि ये वेस्टइंडीज़ का शब्द है। अंग्रेजी में इसे ब्रेकबोन फीवर कहा जाता है। अब सच्चाई क्या है? इसे छोड़कर जरा भारत की तरफ देखकर इसे समझते हैं कि इसका जन्म तो भारत से नहीं हुआ क्योंकि इसका नाम ही भारतीय नहीं है तो हुआ क्यों नहीं?
ये पहला प्रश्न खड़ा होता है। इसके पीछे भारतीय संस्कृति और सभ्यता अर्थात् भारत में वैदिक गणित के अनुसार सम्पूर्ण अध्यात्म विज्ञान विकसित हुआ था। इसका उदाहरण यहॉ से लिया जा सकता है कि हम सबने अपने बचपन में न तो इतने अस्पताल होने की सोची थी और न ही इतना ज्यादा डॉक्टर की आवश्यकता थी। डॉक्टर की आवश्यता 1991 के बाद से प्रारम्भ हुई है जब से हम सब गोल्बल हुए है और विदेशी भोज्य पदार्थ को अपने जीवन में अपनाकर, अपना विकास समझने लगे हैं।
वैसे तो हम सब डब्लूएचओ के सदस्य 1945 से हैं और ये सदस्यता अंग्रेजों ने दिखाई थी। आश्चर्य की बात ये है कि स्थापित भी उन लोगों ने स्वयं डब्लूएचओ को किया था जबकि अंग्रेजों को ये बात पता थी कि भारतीय आयुर्वेद के प्रबल ज्ञाता है और भारत की धरा से ज्यादा आयुर्वेद कहीं पर है भी नहीं परन्तु उनको अपना उद्देश्य पूरा करना था इस कारण उन लोगों ने वो सारी मेम्बरशीप भारत की कराई जो आज भी उनके काम आ रही हैं।
राजीव भाई ने जो औषधि का प्रयोग किया वो है …………….. तुलसी का काढ़ा बनाओ उसमें नीम की गिलोय, सोंठ, छोटी पीपर में थोड़ा गुड़ मिला लो बस इसी औषधि से डेंगू के लाखों व्यक्तियों को ठीक किया था। ये व्याख्यान आज भी नेट पर उपलब्ध है।
सुनील शुक्ल





















