सुगौली/चंपारण, 6 अप्रैल 2026 : बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण बढ़ रही डायबिटीज, मोटापा और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों के बीच “Eating Art is Yoga” एक नई सोच के रूप में सामने आई है। इस अवधारणा को इनोवेटर डॉ. प्रमोद स्टीफन ने प्रस्तुत किया है, इस सिद्धांत में बताया गया है कि हम क्या खाते हैं से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हम कैसे खाते हैं।

डॉ. स्टीफन के अनुसार, भोजन को धीरे-धीरे, ध्यानपूर्वक और अच्छी तरह चबाकर खाना पाचन और हार्मोन संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। भोजन को ठीक से न चबाने से पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ता है, जिससे अपच, गैस, एसिडिटी और पोषक तत्वों के अवशोषण में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि शरीर को पेट भरने का संकेत देने वाले हार्मोन को सक्रिय होने में 15 से 25 मिनट का समय लगता है, जबकि लोग इससे पहले ही भोजन समाप्त कर लेते हैं, जिससे ओवरईटिंग और वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसमें लेप्टिन, घ्रेलिन और इंसुलिन जैसे हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है, जो भोजन की गति और आदतों से प्रभावित होते हैं।

डॉ. स्टीफन के अनुसार, पिट्यूटरी ग्रंथि, जिसे “मास्टर ग्लैंड” कहा जाता है, शरीर के सभी हार्मोन को नियंत्रित करती है और सही खाने की प्रक्रिया इसे संतुलित रखने में सहायक होती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और प्रोसेस्ड फूड के कारण शरीर का प्राकृतिक पाचन और हार्मोन सिस्टम प्रभावित हो रहा है।

इस अवधारणा में भोजन को योग की तरह अपनाने की बात कही गई है, जिसमें ध्यान, संतुलन और शरीर के संकेतों के साथ तालमेल शामिल है। अध्ययन के अनुसार, इस पद्धति से डायबिटीज, मोटापा, थायरॉइड, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि खानपान और जीवनशैली की आदतें डीएनए और आने वाली पीढ़ियों पर भी प्रभाव डाल सकती हैं। डॉ. प्रमोद स्टीफन ने अपनी पुस्तक “Your Health Is In Your Mouth” में इस अवधारणा को विस्तार से समझाया है और इसे अपनाने की सलाह दी है। डॉ स्टीफन का यह सिद्धांत आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस द्वारा स्वीकृत एवं 100 प्रतिशत मान्य है





















