विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। श्रावण, महाशिवरात्रि, नागपंचमी, 84 महादेव, सप्त सागर और पंचकोशी यात्रा जैसे आयोजनों के दौरान शहर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए उज्जैन में यातायात, पार्किंग और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। इसी कड़ी में हरिफाटक चौराहा स्थित पार्किंग क्षेत्र से महाकाल लोक क्षेत्र तक करीब 650 से 700 मीटर लंबी भूमिगत अंडरपास टनल बनाई जा रही है। इस परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति करीब 91.74 करोड़ रुपये की है।
हरिफाटक से महाकाल लोक तक बनेगा भूमिगत कॉरिडोर
सिंहस्थ 2028 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन वैकल्पिक मार्गों और बेहतर क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम पर काम कर रहा है। प्रस्तावित अंडरपास हरिफाटक क्षेत्र की पार्किंग से शुरू होकर जयसिंहपुरा क्षेत्र में त्रिवेणी संग्रहालय के पास बाहर निकलेगा।
इस भूमिगत मार्ग के बनने से महाकाल क्षेत्र की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं और वाहनों को एक अतिरिक्त कनेक्टिविटी मिलेगी। परियोजना पर प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, स्मार्ट सिटी, महाकाल मंदिर समिति और सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के स्तर पर समन्वय किया जा रहा है।
पैदल श्रद्धालुओं के साथ वाहनों के लिए भी उपयोगी होगी टनल
प्रस्तावित अंडरपास को केवल पैदल श्रद्धालुओं के लिए नहीं, बल्कि वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। टनल में दो अलग-अलग बॉक्स बनाए जाएंगे। प्रत्येक बॉक्स की चौड़ाई करीब 9 मीटर होगी।
इनमें लगभग 7.50 मीटर का कैरिजवे और दोनों ओर पैदल चलने के लिए फुटपाथ प्रस्तावित हैं। करीब 5 मीटर की वर्टिकल क्लियरेंस होने के कारण टनल में वाहनों की आवाजाही भी संभव होगी।
बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान इस भूमिगत मार्ग का इस्तेमाल ट्रैफिक डायवर्जन और श्रद्धालुओं की भीड़ को अलग-अलग दिशाओं में नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।
15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य, अप्रैल 2027 तक डेडलाइन
परियोजना की निर्माण अवधि करीब 15 महीने निर्धारित की गई है और इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्माण कार्य हरिफाटक पार्किंग क्षेत्र से शुरू हो चुका है। शुरुआती चरण में जमीन के स्तर से करीब 8 से 10 मीटर नीचे स्लोप तैयार किया जा रहा है। अब तक परियोजना का करीब 15 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी है।
आगे का निर्माण तकनीकी रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि टनल का बड़ा हिस्सा भूमिगत होगा। परियोजना के दायरे में एक थाना, स्कूल और कुछ अन्य भवन भी आ रहे हैं। इनके हटाने के साथ यूटिलिटी शिफ्टिंग और भू-अर्जन से जुड़े कार्य भी परियोजना की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
रेलवे ट्रैक के नीचे से गुजरेगी टनल
इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे बनने वाला अंडरपास होगा। रेलवे ट्रैक के नीचे निर्माण कार्य रेलवे की देखरेख में किया जाएगा।
इसके लिए राज्य शासन की ओर से रेलवे को करीब 31 करोड़ रुपये दिए जाने की बात कही गई है। वहीं, परियोजना को शासन की ओर से 28 अक्टूबर 2025 को 91.74 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। टनल निर्माण की अनुबंधित लागत करीब 35.37 करोड़ रुपये बताई गई है।
शेष राशि का उपयोग भू-अर्जन, भवनों को हटाने, यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य संबंधित कार्यों में किया जाएगा।
रेलवे ट्रैक के नीचे निर्माण के दौरान रेल यातायात, पटरियों की सुरक्षा और जमीन की स्थिरता जैसे तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा। यही हिस्सा परियोजना की समयसीमा और निर्माण प्रक्रिया के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महाकाल क्षेत्र में पहले से चल रहा है टनल सिस्टम
महाकाल मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए पहले से भूमिगत मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग टनल का उपयोग किया जाता है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं को कई कतारों के माध्यम से मंदिर में प्रवेश दिया जाता है। विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। एक दिन में 7 लाख तक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी भी सामने आई है, जबकि सामान्य दिनों में औसतन करीब 2 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इसके अलावा सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल से शहनाई द्वार स्थित न्यू वेटिंग हॉल तक एक और टनल का निर्माण किया जा रहा है। करीब 6 मीटर चौड़ी इस टनल का उद्देश्य हरसिद्धि और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाना है।
हरिफाटक से महाकाल लोक तक बनने वाला भूमिगत मार्ग महाकाल क्षेत्र के टनल नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त कड़ी साबित हो सकता है।
सिंहस्थ में भीड़ और ट्रैफिक मैनेजमेंट में मिलेगी राहत
कलेक्टर के अनुसार, हरिफाटक क्षेत्र से बनने वाला यह भूमिगत रास्ता महाकाल लोक की दिशा में सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा। पार्किंग में वाहन खड़े करने के बाद श्रद्धालु भूमिगत मार्ग से महाकाल क्षेत्र की ओर जा सकेंगे।
सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में जब लाखों श्रद्धालु एक साथ शहर में पहुंचेंगे, तब यह कॉरिडोर भीड़ और यातायात प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हरिफाटक चौराहे पर ट्रैफिक का दबाव होगा कम
हरिफाटक चौराहा उज्जैन के प्रमुख ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल है। इंदौर-उज्जैन मार्ग के अलावा रतलाम, बड़नगर, आगर मालवा, देवास और अन्य क्षेत्रों से आने वाला यातायात इस क्षेत्र से होकर गुजरता है।
बड़े पर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान वाहनों का दबाव बढ़ने से यहां जाम की स्थिति बनती है। अंडरपास के तैयार होने के बाद हरिफाटक क्षेत्र को एक अतिरिक्त कनेक्शन मिलेगा।
पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़े करने के बाद श्रद्धालुओं को भूमिगत मार्ग से महाकाल लोक तक पहुंचाने की व्यवस्था होने पर महाकाल मंदिर क्षेत्र की ओर सीधे जाने वाले यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
VIP और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए अलग रूट की संभावना
प्रस्तावित ट्रैफिक व्यवस्था में सामान्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को अंडरपास के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि हरिफाटक ब्रिज का इस्तेमाल स्थानीय यातायात और जरूरत के अनुसार वीआईपी-वीवीआईपी मूवमेंट के लिए किया जा सकेगा।
इससे बड़े आयोजनों के दौरान सामान्य श्रद्धालुओं, स्थानीय यातायात और प्रोटोकॉल मूवमेंट को अलग-अलग रखने में मदद मिल सकती है।
बारिश के पानी की निकासी के लिए बनेगा ड्रेनेज सिस्टम
भूमिगत टनल में जलभराव रोकना परियोजना की प्रमुख चुनौतियों में से एक है। इसके लिए विशेष अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जाएगा।
बारिश या अन्य स्रोतों से आने वाले पानी को संपवेल और सम्प पिट तक पहुंचाया जाएगा। वहां से पंप के माध्यम से पानी बाहर निकाला जाएगा। जलस्तर की निगरानी के लिए सेंसर और ऑटोमेटिक पंपिंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं।
इसका उद्देश्य बारिश के दौरान टनल में जलभराव रोकना और श्रद्धालुओं तथा वाहन चालकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
हवा, रोशनी और इमरजेंसी सिस्टम पर भी फोकस
टनल के अंदर हवा के प्रवाह और वाहनों से निकलने वाले धुएं की निकासी के लिए भी विशेष डिजाइन तैयार किया जा रहा है। कुछ हिस्सों को ऊपर से खुला रखने की योजना है, जिससे प्राकृतिक रोशनी और हवा अंदर पहुंच सके।
आपात स्थिति से निपटने के लिए टनल में इमरजेंसी अलार्म और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। किसी श्रद्धालु की तबीयत खराब होने या अन्य आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए भी व्यवस्था की जाएगी।
दो बॉक्स डिजाइन से भीड़ नियंत्रण में मदद
सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में लाखों लोगों की एक साथ आवाजाही प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी। टनल के दो अलग-अलग बॉक्स होने से अलग-अलग दिशा में जाने वाले श्रद्धालुओं और यातायात को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
आने-जाने वाले लोगों के प्रवाह को अलग रखने से किसी एक स्थान पर अत्यधिक भीड़ का दबाव कम किया जा सकता है। आपात स्थिति में सुरक्षा और बचाव एजेंसियों के लिए भी स्पष्ट मार्ग उपलब्ध कराया जा सकेगा।
महाकाल लोक के दूसरे चरण में कई सुविधाएं विकसित
महाकाल लोक के दूसरे चरण के तहत श्रद्धालुओं की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई विकास कार्य किए गए हैं। पार्किंग क्षमता बढ़ाने के साथ त्रिवेणी गेट से श्रद्धालुओं की एंट्री को सुगम बनाने पर भी काम हुआ है।
रुद्र सागर में एक ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा अनुभूति वन और तपोवन जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। एक पुराने स्कूल भवन को हेरिटेज होटल में बदला गया है।
एक साथ 3 हजार लोग कर सकेंगे भोजन
महाकाल लोक के दूसरे चरण में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से अन्नक्षेत्र/भोजनशाला भी तैयार की गई है। यहां एक समय में करीब 3 हजार लोग भोजन कर सकेंगे, जबकि पूरे दिन में करीब एक लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था करने की क्षमता रखी गई है।
अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था होगी। विशेष अवसरों पर यहां पारंपरिक व्यंजन जैसे दाल-बाफले भी बनाए जा सकेंगे।
सिंहस्थ 2028 से पहले तैयार करना बड़ी चुनौती
हरिफाटक से महाकाल लोक तक बनने वाली यह अंडरपास टनल उज्जैन के भविष्य के ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब 650 से 700 मीटर लंबे इस भूमिगत कॉरिडोर के तैयार होने से पार्किंग क्षेत्र और महाकाल लोक के बीच एक वैकल्पिक कनेक्शन उपलब्ध होगा।
फिलहाल परियोजना का करीब 15 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी है। रेलवे ट्रैक के नीचे निर्माण, यूटिलिटी शिफ्टिंग, भवनों से जुड़े कार्य और भूमिगत निर्माण इसकी सबसे बड़ी चुनौतियां हैं।
यदि परियोजना अप्रैल 2027 की निर्धारित समयसीमा में पूरी होती है, तो सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को महाकाल क्षेत्र तक पहुंचने के लिए एक महत्वपूर्ण नया भूमिगत मार्ग मिल जाएगा। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही, ट्रैफिक डायवर्जन और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

























