सत्यम् लाइव, 22 मई 2021, दिल्ली।। वैसे तो सेवा का नाम ही अर्पण करने से प्रारम्भ होता है। हम या आप कोई भी हो यदि सेवा भाव रखते हैं तो सबसे पहले त्याग की भावना का प्रबलता के साथ अपने जीवन में अपनाना होगा और ये भाव यदि गौ सेवा से हो तो भावुकता के साथ आस्था प्रधान हो जाती है। ऐसा ही सुनने को मिला जब राघव गौवर्धन गौशाला में जानकारी के लिये पहुॅचा। जैसा कि आप सभी जानते हैंं कि श्री राघव गोवर्धन गौशाला समिति, शिवली, कानपुर देहात को अभी अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। गौ सेवा हेतु लगे हुए अपने माता-पिता सहित राघव शुक्ल की परीक्षा तब और ज्यादा बढ जाती है जब आस-पास कहीं से फाेेन आ जाता है कि गाय या बछडा घायल अवस्था में पडा हुआ है।
गौ सेेेेवा ऐसी ही सूचना मिलने पर घायल असमर्थ एवं बछडा जाेे उठ भी न सके उसे उठाकर लाने में बहुत बडी समस्या बन जाती थी ऐसी ही दशा के लिये एक मशीन लगा ली है जिससे माध्यम से बछड़े को खड़ा तो किया जा सकता है। अब कहीं से भी जब सूचना मिलती है तो श्री राघव गोवर्धन गौशाला समिति की टीम मौके पर पहुंची और गोवंश को गौशाला में लेकर आया जाता है और फिर निरंतर उक्त गोवंश का उपचार जारी रखा जाता है इस काऊ लिफ्टिंग मशीन के माध्यम गौमाता या बछड़े को खड़ा किया जाता है और गोवंश का उपचार सरलता के साथ किया जा सकता है।
इस तरह के आये पाये गये सभी गौ वंश को स्वस्थ रखने में श्री राघव गोवर्धन गौशाला समिति अब सफलता की सीढी का पहला पावदान चढ चुकी हैै श्री राघव गोवर्धन गौशाला समिति के सभी सदस्यों ने एक मत होकर कहा कि अभी तो उक्त सभी गौ वंश को इस स्थिति पर ले जाकर समाज के सामने रखना है कि घायल अवस्था पर पाये जाने पर गौ वंश का उपचार सभी कर सकें साथ ही शिक्षा केे माध्यम जो श्री राघव गोवर्धन गौशाला समिति ने रसोई चिकित्सा के माध्यम से जो आयुर्वेद का परिचय करा रहे हैं रसोई चिकित्सा व्यवस्था की पूरक गौ वंश ही करेगा अत: जैविक खेती की ओर भारतीय समाज को ले जाने की कल्पना तभी पूरी हो सकेगी जब हर घर का बच्चा भारतीय परिवेश से डॉक्टर और इंजिनियर होगा।
सुनील शुक्ल





















