“न्याय नहीं मिला तो 2027 में बदलेगा सत्ता का समीकरण” – नवलोक मझवार समाज की चेतावनी
मेरठ में हुए सोनू कश्यप हत्याकांड को लेकर नवलोक मझवार/निषाद समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस जघन्य घटना ने न केवल एक परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है, बल्कि पूरे समाज के आत्मसम्मान को भी आहत किया है। इसी को लेकर निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पूरन सिंह कश्यप की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक चेतावनी भरा पत्र भेजा गया है।
पत्र में कहा गया है कि सोनू कश्यप की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ किया गया अपराध है। समाज न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर जो रवैया सामने आया है, वह अत्यंत निराशाजनक और असंवेदनशील है। इससे यह संदेश जा रहा है कि कमजोर और पिछड़े समाज की पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
पत्र में इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जब-जब निषाद और मझवार समाज के साथ अन्याय हुआ है, तब-तब समाज ने सत्ता को सबक सिखाया है। बसपा सरकार के समय जमुना निषाद के साथ हुए अन्याय और सपा सरकार के कार्यकाल में समाज पर हुए दमन का राजनीतिक परिणाम प्रदेश ने देखा है। समाज ने एकजुट होकर सत्ता परिवर्तन किया था।
नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “न्याय में देरी, अन्याय के समान है।” यदि सोनू कश्यप के हत्यारों को जल्द से जल्द कठोरतम सजा नहीं दी गई और पीड़ित परिवार की आर्थिक व सुरक्षा संबंधी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो इसे सरकार की विफलता माना जाएगा।
पत्र में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भी कड़ा संदेश दिया गया है। कहा गया है कि नवलोक मझवार समाज अब किसी भी राजनीतिक दल का स्थायी वोट बैंक नहीं है। यदि इस मामले में न्याय नहीं मिला, तो जैसे समाज पहले सपा और बसपा से विमुख हुआ, वैसे ही भाजपा से भी दूरी बना लेगा, जिसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ेगा।
समाज की प्रमुख मांगों में हत्यारों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से फांसी की सजा, पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई शामिल है।
अंत में चेतावनी दी गई है कि यदि सोनू कश्यप के परिवार को न्याय नहीं मिला, तो नवलोक मझवार समाज निर्णायक आंदोलन छेड़ने और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को जवाब देने के लिए बाध्य होगा।






















