नई दिल्ली: नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है. कु का अर्थ होता है छोटा, इश का मतलब ऊर्जा और अंडा यानि ब्रह्मांडीय गोला. तो कुष्मांडा का अर्थ हुआ सृष्टि या ऊर्जा का छोटा सा ब्रह्मांडीय गोला. इस दिन मां कुष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाएं और किसी ब्राह्मण को दान कर दें. इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी अच्छी हो जाएगी.
नवरात्रि के चौथे दिन के व्रत में शाम को अपनी फलाहारी थाली में अलग-अलग तरह के पकवानों से सजी थाली का आनंद ले सकते हैं. इसमें कुट्टू के आटे की पूरियां, साबूदाने का पापड़, केला अनार का रायता, मखाने की खीर, आलू की सूखी सब्जी, फलों का श्रीखंड, साबूदाना रबड़ी, खीरा-गाजर का सलाद आदि शामिल कर सकते हैं.
देवी कूष्मांडा को मलपुए का प्रसाद चढ़ाया जाता है तो आप भी अपनी फलाहारी थाली में मलपुआ रख सकते हैं. इसके अलावा मीठे में चीला भी रख सकते हैं.





















