कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने से जुड़े मामले में दिल्ली की अदालत ने अहम आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने मजिस्ट्रेट द्वारा सितंबर 2025 में दिए गए उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग वाली शिकायत खारिज कर दी गई थी। अब मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी।
यह मामला उस आरोप से जुड़ा है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने भारतीय नागरिकता 1983 में हासिल की थी। इस आधार पर शिकायतकर्ता ने जांच और आपराधिक कार्रवाई की मांग की थी। इन आरोपों का सोनिया गांधी की ओर से विरोध किया गया है।
मजिस्ट्रेट का आदेश हुआ रद्द
विशेष अदालत ने माना कि मजिस्ट्रेट का पिछला आदेश मामले में उठाए गए आरोपों और तथ्यों पर पर्याप्त विचार किए बिना पारित किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने आदेश को ‘नॉन-स्पीकिंग’ बताते हुए मामले को दोबारा विचार के लिए निचली अदालत में भेज दिया है।
अदालत के आदेश के बाद अब मजिस्ट्रेट को शिकायत पर दोबारा सुनवाई करनी होगी और कानून के मुताबिक कारण स्पष्ट करने वाला नया आदेश पारित करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होनी है।
सोनिया गांधी की ओर से आरोपों का विरोध
सोनिया गांधी की ओर से अदालत में दाखिल जवाब में आरोपों को खारिज किया गया था। उनकी ओर से कहा गया कि शिकायत राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसमें मीडिया रिपोर्टों, अनुमानों तथा व्यक्तिगत धारणाओं पर भरोसा किया गया है। जवाब में यह भी कहा गया कि किसी विशिष्ट कथित फर्जी दस्तावेज की पहचान नहीं की गई है।
वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से जुड़े रिकॉर्ड और परिस्थितियों की जांच की मांग की गई है।
मामला अभी जांच और सुनवाई के चरण में
अदालत द्वारा मजिस्ट्रेट का पिछला आदेश रद्द किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। अब निचली अदालत मामले पर उपलब्ध सामग्री, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी पहलुओं पर नए सिरे से विचार करेगी।





















