सत्यम् लाइव, 27 फरवरी 2020, उत्तरी पूर्वी दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से चल रहे, समुदायिक में छिडे दंगे पर अब काफी मात्रा में लगाम लग चुकी है। आज की सुबह बहुत बडी मात्रा में सभी एक साथ पुन: पार्क में एकत्रित होकर प्राणायम किया। धीरे धीरे अब मौहाल शान्ति की ओर जाने लगा है। व्यक्ति पुन: अपनी सामान्य जीवन जीने लगा है। परन्तु पूरे क्षेत्र में आज भी इस बात से शांंकाग्रस्त है कि ये अराजक तत्व कहॉ से आये थे जो पूरे क्षेत्र में अराजकता का मौहाल फैलाकर चले गये। क्योंकि पूरा क्षेत्र ही ये कहने लग रहा है कि इनमें सेे एक भी व्यक्ति इस क्षेत्र का नहीं था कल सत्यम् लाइव के पत्रकारों ने जब भजनपुरा से लेकर अशोक नगर तक केे बीच का पूरा दौरा कर लोगों से प्रश्न किये तो हिन्दु हो या मुस्लिम सभी का यही कहना था कि ये अराजक तत्व हमारे क्षेत्र के नहीं थे। बहुत बडी मात्रा मेें अराजक तत्व केे रूप से एक भीड के रूप मेंं आयी और जो पाया या तो आग के हवाले कर दिया या फिर अपने साथ ले गये। इस क्षेत्र केे िनिवासी का यहॉ तक का कथन है कि यदि दूसरे की दुकान हम बचाते तो हम भी मारे जाते। साथ ही अशोक नगर के दुकान पर जब आग लगा रहे थे तब किसी घर से उसकी विडियो बनानी चाही तो उसके घर पर भी पत्थर गया और चारोें तरफ से ये अराजकत तत्व मना कर रहे थे कि वीडियो मत बनाओ। बहराल कुछ भी हुआ हो ये तो सभी कहते नजर आये कि जो कुछ भी हुआ वो ठीक नहीं हुआ वो हिन्दु के साथ हो रहा हो या मुस्लिम के साथ। एक निवासी ने तो यहॉ तक कहा कि हिन्दु मुस्लिम ने मिलकर पूरी रात्रि जगकर एक दूसरे का काम भी किया तथा साथ ही लाठी लेकर पहरा भी दिया। पूरे क्षेत्र में अभी भी एक डर का मौहाल बना हुआ है जबकि दूसरी तरफ सभी एक दूसरे को सात्वनां देने का काम भी कर रहे है। अब मौहाल लगभग ठीक है वशर्ते गलती किसी की हो जिसके घर से एक भी व्यक्ति चला गया या जिसकी कारोबार ठप पड गया उसका साथ अब कौन देगा ? बात यहॉ पर किसी कौम विशेष की नहीं है। भारत में व्यापार की ये स्थिति है कि एक दूसरे के साथ मिले बिना कोई अपना परिवार चला नहीं सकता है क्योंकि भारत की भूमि इतना उत्पादन करती है। एक दूसरे पर निर्भर रहने वाली ये सोसाइटी भला एक दूसरे से कैसे लड सकती है, इससे ये तय होता है कि अराजकता कोई दूसरा करता है और हानि उसकी होती है जो अपने परिवार को चलाने के लिये दिन रात संघर्ष करता है।






















