सत्यम् लाइव, 17 जुलाई 2020, दिल्ली।। भगवान राम के जन्म से पहले जिस यज्ञ स्थली पर यज्ञ कराया गया था। यह स्थल मखौडा, वस्ती मेें है। आज सुबह इतना नदी की उफान तथा बारिश केे कारण आज का दृश्य आपको देखने को मिल रहा है।

श्रीरामचरितस्थल में जो मैनें लिखा है वो पूरा लेख श्रीराम सांस्कृति शोध संस्थान न्यास के शोध के माध्यम से लिखा है उसी के कुछ अंश आज के छायाकार सुरेश पाण्डे के चित्र के साथ प्रस्तुत कर रहा हॅूूू।

दशरथ जी तथा तीनों माता ने गुरू वशिष्ठ से पुत्र न होने के कारण अपना दुःख कहा गुरू वशिष्ठ ने दशरथ जी से कहा कि सूर्य देवता जब उत्तरायण में प्रवेश करते हैं तब अपने कुल देवता से जो भी माँगो वो इच्छा अवश्य पूरी होती है। तब दशरथ सहित तीनों रानी ने अपने वंश को आगे न चल पाने का दुःख कहा। गुरू वशिष्ठ ने उस समय श्रृंगी ऋषि का नाम सुझाते हुये कहा, ‘‘अथर्ववेद मन्त्रों से पुत्रोष्टि नामक यज्ञ कराने का सुझाव दिया। वेदोक्त विधि के अनुसार अनुष्ठान करने पर यज्ञ अवश्य सफल होगा।’’ (वा.रा. 1/15/2) तत् पश्चात् श्रृंगी ऋषि को आमंत्रित करने चल पड़े। श्रृंगी ऋषि सिहावा, धमतरी के आश्रम में थे।

राजा दशरथ, सात बहनें, भजन गायिका तथा कुछ वीर सैनिकों सहित श्रृंगी ऋषि के आश्रम की ओर चल पड़ते हैं। श्रृंगी ऋषि के पास पहुँच कर सात बहनें, जिस स्थल पर ठहरीं थी आज उस स्थल को साद बहना के नाम से जाना जाता है। वीर सैनिक जहाँ ठहरे थे उसे वीर गुडी के नाम से तथा पास ही एक गाँव का नाम सेमरा है इस स्थल पर अन्य सैनिक के रूकने की व्यवस्था की गयी थी। अनुनय-विनय के पश्चात्, श्रृंगी ऋषि अयोध्या आ जाते हैं।

अयोध्या प्रस्थान पर मखौड़ नामक स्थल पर यज्ञशाला तैयार करायी जाती है। यज्ञ स्थली अयोध्या जी से लगभग 10 कि.मी. पश्चिोत्तर दिशा मखोड़ा जिला वस्ती में बनायी गयी थी। अवधी भाषा में यज्ञ को मख कहा जाता है अतः मखोड़ा ही वो स्थान है। महबूब गंज से 3 कि.मी. उत्तर दिशा में सरयू जी के किनारे, शेरवाघाट, फैजाबाद नामक स्थल पर श्रृंगी ऋषि के रूकने का प्रबन्ध किया गया था। मान्यता है कि यही पर श्रृंगी ऋषि यज्ञ के दौरान ठहरे थे। आज भी यहां पर संतों की कुटिया है। यज्ञ समाप्ति के छः ऋतुओं के पश्चात् चारों पुत्रों का जन्म हुआ। (वा.रा. 1/15/2)। कम्ब रामायण के अनुसार, कौशल्या माता के गर्भ से, चैत्र मास की नवमी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में प्रगट हुये। माता कैकेयी ने ‘पुष्प नक्षत्र’ और ‘मीन लग्न’ माँ बनी। सुमित्रा माँ ने आश्लेष नक्षत्र तथा कर्क लग्न में पहले पुत्र को तथा सिंह शशि, मघा नक्षत्र में दूसरे पुत्र को जन्म दिया। गुरू वशिष्ठ ने चारों पुत्रों का नामकरण किया, कौशल्या नन्दन का नाम अखिल-विश्व को आनन्द देना वाले सुखधम का नाम राम तथा कैकेय के पुत्र का नाम, जो विश्व भर का अपने ज्ञान के माध्यम से, जो भरण पोषण करे उसका नाम भरत तथा सुमित्रा के दोनों पुत्रों का नाम है, जो समस्त लक्षणों से युक्त होने पर पहले पुत्र का नाम लक्ष्मण तथा शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाले का नाम दूसरे पुत्र का नाम शत्रुघन रखा गया। अखिल ब्रह्माण्ड के नायक की अयोध्या जन्मस्थली बनी।

उपसम्पादक सुनील शुक्ल






















