योगेश कुमार, खोड़ा, गाजियाबाद | गाजियाबाद के खोड़ा स्थित वार्ड नंबर 23 के हिमालय एंक्लेव में प्राचीन शिव शक्ति दुर्गा मंदिर परिसर में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को भव्य कलश यात्रा के साथ संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। रथ, डीजे और बैंड-बाजे के साथ निकली यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भाग लिया और क्षेत्र में राधे-कृष्ण के जयकारे गूंजते रहे।
मंदिर सेवा समिति ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी पंडित संतोष मिश्रा ने बताया कि कलश यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। धार्मिक उल्लास और भक्ति के वातावरण के बीच यात्रा विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ कलश स्थापित किए गए।
हिमालय एंक्लेव सहित कई क्षेत्रों से होकर गुजरी कलश यात्रा
आयोजकों के अनुसार, कलश यात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर हिमालय एंक्लेव, प्रेम विहार, सेक्टर-62, पवन विहार, सैनिक विहार और इतवार बाजार सहित विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरी। इसके बाद यात्रा वापस मंदिर परिसर पहुंची, जहां धार्मिक विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई।
कलश यात्रा के साथ ही मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
25 से 31 अक्टूबर तक चलेगी श्रीमद्भागवत कथा
मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी। कथा के मुख्य यजमान श्रीमती सुमन मिश्रा एवं पंडित शेषनारायण मिश्रा हैं।
श्री अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास संत श्री श्यामदास जी महाराज अपने श्रीमुख से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत की कथा का रसपान करा रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार, कथा का समापन 1 नवंबर 2026, रविवार को हवन एवं विशाल भंडारे के साथ किया जाएगा।
प्रथम दिवस पर भागवत महात्म्य और नैमिषारण्य प्रसंग का वर्णन
श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ मंगलाचरण और भगवान श्रीकृष्ण की वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर निम्न श्लोक का पाठ किया गया—
“सच्चिदानंदरूपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे। तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुमः॥”
कथा व्यास संत श्री श्यामदास जी महाराज ने भागवत महात्म्य, मंगलाचरण और नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों तथा सूतजी के संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नैमिषारण्य की पवित्र भूमि पर 88 हजार ऋषियों ने सूतजी से कलियुग में मानव कल्याण, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष प्राप्ति के साधनों के विषय में जिज्ञासा व्यक्त की थी।
कथा के दौरान भागवत महात्म्य के अंतर्गत आत्माराम, उनकी पत्नी धुंधली, दुष्कर्मों में लिप्त पुत्र धुंधकारी और ज्ञानवान पुत्र गोकर्ण की कथा भी सुनाई गई। इन आध्यात्मिक प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण देखने को मिला।
मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों सहित गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस धार्मिक आयोजन में मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष श्री विनोद तिवारी सहित विनोद कुमार नागर, डी.पी. उपाध्याय, हरिश्चंद्र शर्मा, परमात्मा यादव, सूरज सिंह कुशवाह, कृष्ण स्वरूप वर्मा, हृदयराम मिश्रा, संदीप मिश्रा, राजू गुप्ता, घनश्याम तिवारी, जगधर पहलवान, पंडित संतोष मिश्रा, संतोष वर्मा, नारायण सिंह कुशवाह, मनमोहन तिवारी, मनोज चौहान, दिलीप सिंह कुशवाह, डी.डी. तिवारी, रामअनुज मिश्रा, इंद्रदेव तिवारी, शिव प्रसाद पांडेय, जंगबीर सिंह, समरपाल सिंह, शिवराम सिंह, शंकर पटेल, सुधांशु, अनुराग और डब्बू सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होने की अपील
आयोजन समिति ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ के साथ हिमालय एंक्लेव स्थित प्राचीन शिव शक्ति दुर्गा मंदिर में आगामी दिनों तक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। समिति ने श्रद्धालुओं से कथा में सहभागिता कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।














