सत्यम् लाइव, 13 अप्रैल 2021, दिल्ली।। वो 13 अप्रैल का काला दिन था जब रौलेट एक्ट का विरोध में पंजाब प्रान्त के अमृृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जालियाँवाला बाग हत्याकांड हुुआ था। जनरल डायर अंग्रेज अधिकारी ने रौलेट एक्ट का विरोध में शान्ति से सभा करते हुुए भीड पर बिना चेतावनी के गोली चलवा दी थी और जिसमें अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है।
ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है जिनमें से 337 पुरुष, 41 नाबालिग लड़के और एक 6 सप्ताह का बच्चा था। अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए। यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी।





















