हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और आधी रात को कान्हा के जन्म के बाद उनका विशेष पूजन करते हैं। मान्यता है कि जन्माष्टमी से पहले घर में कुछ शुभ वस्तुएं लाने से सकारात्मकता का संचार होता है और पूजा की तैयारियां भी पूरी हो जाती हैं।
अगर आप भी इस साल जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पर्व से पहले इन 5 चीजों को घर लाना शुभ माना जाता है।
1. लड्डू गोपाल की नई पोशाक
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है। ऐसे में पर्व से पहले उनके लिए नई पोशाक घर लाना शुभ माना जाता है। आप अपनी पसंद के अनुसार पीले, लाल, हरे या अन्य रंगों की सुंदर पोशाक ला सकते हैं। पूजा के समय लड्डू गोपाल को नई पोशाक पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है।
2. बांसुरी
भगवान श्रीकृष्ण की सबसे प्रिय वस्तुओं में बांसुरी का विशेष स्थान माना जाता है। जन्माष्टमी से पहले घर में छोटी सी बांसुरी लाकर उसे भगवान कृष्ण के पास रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बांसुरी प्रेम, मधुरता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
3. मोर पंख
भगवान कृष्ण के मुकुट में मोर पंख हमेशा से उनकी पहचान का हिस्सा रहा है। जन्माष्टमी से पहले घर में मोर पंख लाकर पूजा स्थल पर रखना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक रहता है और नकारात्मकता दूर होती है।
4. माखन-मिश्री
श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री बेहद प्रिय मानी जाती है। जन्माष्टमी की पूजा में भी माखन-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा है। इसलिए जन्मोत्सव से पहले माखन और मिश्री की व्यवस्था कर लेना चाहिए। आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म के बाद उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाया जा सकता है।
5. झूला और श्रृंगार की सामग्री
जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को पालने में झुलाने की परंपरा है। ऐसे में जन्माष्टमी से पहले भगवान कृष्ण के लिए सुंदर झूला घर लाना या तैयार करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही फूल, मुकुट, हार, बिंदी, पायल और अन्य श्रृंगार सामग्री भी रख सकते हैं। जन्म के समय लड्डू गोपाल को झूले में विराजमान कराकर विधि-विधान से पूजा की जाती है।
जन्माष्टमी पर इन चीजों का रखें ध्यान
जन्माष्टमी के दिन पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को साफ वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार करें। पूजा के दौरान फल, माखन-मिश्री, पंचामृत और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म के समय शंख और घंटी बजाकर पूजा करने की परंपरा है।


























