- तुलसी पूजन से जुड़े ये लाभ, स्कंद और पद्म पुराण में मिलता है उल्लेख
- घर में तुलसी पूजन से मिलते हैं कई लाभ, धार्मिक ग्रंथों में वर्णन
- तुलसी के पौधे की 108 परिक्रमा से दूर होता है दारिद्र्य, शास्त्रों में मान्यता
धार्मिक शास्त्रों में तुलसी पूजन और गो सेवा को शुभ कर्म बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में इनका नियमित रूप से पालन किया जाता है, वहां कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं।
तुलसी के धार्मिक महत्व का उल्लेख विभिन्न पुराणों में भी मिलता है। इनमें तुलसी के पौधे की स्थापना, पूजा, सिंचाई, ध्यान और परिक्रमा से जुड़े पुण्य का वर्णन किया गया है।
स्कंद पुराण में तुलसी का उल्लेख
‘स्कंद पुराण’ के अनुसार, जिस घर में तुलसी का बगीचा हो और प्रतिदिन उसका पूजन किया जाता हो, वहां यमदूत प्रवेश नहीं करते।
वहीं, ‘पद्म पुराण’ में कहा गया है कि कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान, रोपण और धारण करने से पाप नष्ट होते हैं तथा स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तुलसी की लकड़ी और अंतिम संस्कार
‘पद्म पुराण’ के उत्तर खंड में तुलसी की सूखी लकड़ियों से जुड़े धार्मिक महत्व का भी उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि किसी पापी या अपराधी व्यक्ति के शव पर तुलसी की सूखी लकड़ियां रखकर और तुलसी की लकड़ी से अग्नि प्रज्वलित करने पर उसकी दुर्गति से रक्षा होती है तथा यमदूत उसे नहीं ले जा सकते।
गरुड़ पुराण में भी बताया गया है महत्व
‘गरुड़ पुराण’ के धर्म कांड-प्रेत कल्प 38.99 में तुलसी के पौधे को लगाने, उसका पालन करने और सींचने के साथ ध्यान, स्पर्श तथा गुणगान के महत्व का वर्णन किया गया है।
धार्मिक ग्रंथ के अनुसार, इन कार्यों से मनुष्य के पूर्व जन्म में अर्जित पाप जलकर नष्ट हो जाते हैं।
मृत्यु के समय तुलसी का महत्व
‘ब्रह्मवैवर्त पुराण’ के प्रकृति खंड 21.43 में मृत्यु के समय तुलसी पत्ते सहित जल का सेवन करने का उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि ऐसा करने वाला व्यक्ति संपूर्ण पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को प्राप्त करता है।
तुलसी की 108 परिक्रमा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति दारिद्र्य दूर कर सुख-संपदा प्राप्त करना चाहता है, उसे शुद्ध भाव और भक्ति के साथ तुलसी के पौधे की 108 परिक्रमा करनी चाहिए।


























