सत्यम् लाइव, 18 अगस्त 2021, दिल्ली।। सुभाष चन्द्र बोस जी का जन्म 23 जनवरी 1897 तथा मृत्यु 18 अगस्त 1945 को बताई जाती है परन्तु बहुत से सबूत ये कहते हैं कि आईसीएस टॉप करने के बाद त्यागपत्र देकर देश को अंग्रेजों से स्वतंत्रत कराने की लड़ाई लड़ने वाले नेता जी की मृत्यु उस घटना में नहीं हुई।
भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे। 18 अगस्त 1945 का दिन था जब सुभाष चन्द्र बोस जी ने मंचूरिया की तरफ उड़ान भरी थी और इसके बाद किसी को फिर कभी नहीं दिखे। 5 दिन बाद अर्थात् 23 अगस्त 1945 को टोक्यो रेडियो खबर आती है कि नेताजी जिस विमान से जा रहे थे वो ताइहोकू हवाई अड्डे के पास क्रैश हो गया और हादसे में नेताजी बुरी तरह से जल गए इसके पश्चात् ताइहोकू सैनिक अस्पताल में उनका निधन हो गया। सभी यात्री भी मारे गए।
नेता जी की मौत का सच जानने के लिए अब तक तीन कमेटियां बनाई जा चुकी हैं जिसमें से दो ने रिपोर्ट है कि नेताजी की मौत प्लेन क्रैश में हुई। जबकि 1999 में तीसरी कमेटी मनोज कुमार मुखर्जी की रिपोर्ट है कि 1945 में कोई प्लेन क्रैश की घटना ही नहीं हुई। इस प्लेन क्रैश का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस रिपोर्ट को सरकार ने अस्वीकार कर दिया था।
नेताजी के जीवन की बिडवना थी कि उन्हें आईसीएस में टॉप किया और फिर उसी पोस्ट से त्यागपत्र दिया। इस घटना क्रम को स्वदेशी प्रवक्ता जिन्हें आज महर्षि राजीव दीक्षित कहा जा रहा है ने सुनाया है और बताया है कि इस पोस्ट को भारत माता को लुटने के लिये बनाया गया है इस पोस्ट पर मैं नौकरी नहीं कर सकता हूॅ।
नेताजी के निधन खबर के बाद भी कई खबरें आती रही हैं और यहॉ तक दावा किया गया कि फैजाबाद में गुमनामी बाबा ही सुभाष चन्द्र बोस थे। फैजाबाद से लेकर छत्तीसगढ़ में उनको कई जगह पर देखे जाने की खबरें आती रहीं परन्तु राज्य सरकार और केन्द्र सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया। गुमनामी बाबा निधन के बाद उनके पास से नेताजी के परिवार की तस्वीरें, पत्र-पत्रिकाओं ऐसे कई अहम लोगों के पत्र तथा शाहनवाज आयोग एवं खोसला आयोग की रिपोर्ट जैसी अहम् सबूत भी शायद यही वयां करते हैं कि गुमनामी बाबा ही सुभाष चन्द्र बोस थे।
सुनील शुक्ल





















