उज्बेकिस्तान के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजधानी में औपचारिक अभिनंदन किया गया। इस दौरान उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता में भाग लिया। इस बैठक का मुख्य ध्येय दोनों राष्ट्रों के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूती देना और परस्पर सहयोग के नए आयाम तय करना है।
सांस्कृतिक जुड़ाव और योग सत्र में भागीदारी
ताशकंद में ‘योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान’ द्वारा एक विशेष योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सत्र में शिरकत की, जहां 52 स्थानीय योग साधकों ने विभिन्न योगासनों का प्रदर्शन किया। पीएम मोदी ने इस आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों के उत्साह और प्रदर्शन की सराहना की। इसके साथ ही, उन्होंने देश में योग के प्रसार के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के प्रयासों की प्रशंसा की और सभी योग साधकों को शुभकामनाएं दीं।
व्यापारिक और रक्षा संबंधों पर विशेष ध्यान
दो दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। वार्ता के अंत में कई अहम द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। ताशकंद आगमन के बाद प्रधानमंत्री ने ‘यांगी उज्बेकिस्तान पार्क’ में देश के 30वें स्वतंत्रता दिवस के प्रतीक आजादी स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा, उन्होंने शास्त्री स्मारक तथा महात्मा गांधी केंद्र का भी भ्रमण किया।
शिखर सम्मेलन के लिए बिश्केक प्रस्थान
उज्बेकिस्तान की यात्रा पूरी करने के पश्चात, प्रधानमंत्री 31 अगस्त को 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे। इस वर्ष यह संगठन अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसकी मुख्य थीम ‘टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि’ पर केंद्रित है। बिश्केक में पीएम मोदी औपचारिक रात्रिभोज और मुख्य सत्र में भाग लेने के साथ-साथ अपना संबोधन देंगे। इस दौरान कई वैश्विक नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं।
नेताओं के बीच प्रगाढ़ होते संबंध
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण मंचों पर मुलाकातें हो चुकी हैं, जिनमें 2023 का COP28 (दुबई), 2024 का ब्रिक्स सम्मेलन (कजान) और 2025 का एससीओ समिट (तियानजिन) शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में भारतीय संस्कृति के विशेषज्ञों (इंडोलॉजिस्ट) और विद्वानों से भी संवाद करेंगे।


























