सत्यम् लाइव, 1 जून 2021, दिल्ली।। भारत में पिछले साल मार्च 2020 से पूरे भारत में कोरोना संक्रमण के कारण लाॅकडाउन लगाया गया था। जिसमें सभी व्यवसाय से लेकर स्कूल, काॅलेज, व अन्य संस्थाओं को बंद किया गया था। इस लाॅकडाउन के कारण शिक्षा व्यवस्था बहुत बुरी अवस्था में पहुंच गई है। सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में विफल होती नजर आ रही है। आप इस बात से अंदाजा लगा सकते है की अभिवावकों में यह रोश साफ नजर आ रही है की हमारे बच्चों का भविष्य अब क्या होगा क्योंकि पिछले साल से जो शिक्षा ऑननलाइन शिक्षा व्यवस्था शुरू हुई इससे बच्चों में कई प्रकार से मानसिक तनाव के साथ उनके व्यवहार में बदलाव आ रहा जो उनके काफी हानिकारक साबित हो रही हैं।
तो वहीं शिक्षा में 10वीं और 12वी की पढाई का बड़ा महत्व होता है क्योंकि यह वहीं समय होता जब विद्यार्थि अपने भविष्य की आगे की पढ़ाई की रूप रेखा तैयार करते है या यूं कहे तो अपने भविष्य की नींव रखते है। तो वही राज्य सरकारों ने अपने – राज्यों के 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को अपने शिक्षा बोर्ड के तहत उनको अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया है। तो वहीं 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के परीक्षा को लेकर अभी भी उलझने बनी हुई है।
12वीं की परीक्षा को लेकर सरकार ने कई अहम बैठके की है जिससे साफ है की 12वी की बोर्ड परीक्षा होना लगभग तय है बस सरकार इस पर एक सुरक्षित व्यवस्था को लेकर चिंचित है। तो वहीं महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि कक्षा 10वीं (एसएससी) और कक्षा 12वीं (एचएससी) की परीक्षाओं की तुलना नहीं की जा सकती है, क्योंकि 12वीं कक्षा की परीक्षा विद्यार्थियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक महत्वपूर्ण होती है। राज्य सरकार ने अपने शपथपत्र में कहा कि छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों की सुरक्षा पर विचार करने के बाद कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच 10वीं कक्षा की परीक्षाओं को रद्द किया गया है।
मंसूर आलम






















