सत्यम् लाइव, 15 अप्रैल, 2021, नई दिल्ली : कोरोना सबको हो सकता है पर ये ध्यान रहे कि हमारी मन:स्थिति कैसी है इसपर उसके होने वाले प्रभाव का असर पड़ता है । अमेरीका मे एक कैदी को जब फाँसी की सजा सुनाई गई तब वहाँ के कुछ वैज्ञानिकों ने विचार किया कि क्यूँ न इस कैदी पर एक प्रयोग किया जाये, उस कैदी को बताया गया कि उसे फाँसी के बजाय विषधर कोब्रा से डसवा कर मारा जाएगा।फाँसी वाले दिन उसके सामने एक बड़ा विषधर साँप लाया गया तथा कैदी की आँखो पर पट्टी बाँध कर कुर्सी पर बाँध दिया गया।इसके बाद उसे साँप से ना डसवा कर सेफ्टी पिन चुभाई गई ।
आश्चर्य की बात यह हुई कि कैदी की २ सेकंड में ही मौत हो गई।*
पोस्टमार्टम रिपोर्ट मे कैदी के शरीर में
“व्हेनम सदु्श्यम”
विष मिला ,ये विष कहाँ से आया जिससे कैदी की मृत्यु हुई ? पोस्टमार्टम के बाद पता चला कि ये विष कैदी के शरीर में मानसिक डर की वजह से, उसके शरीर ने ही उत्पन्न किया था।अतः
तात्पर्य ये है कि हमारी अपनी मानसिक स्थिति के अनुसार Positive अथवा Negative
एनर्जी उत्पन्न होती है तद्दानुसार ही हमारे शरीर में HORMONES पैदा होते हैं 90% बीमारी का मूल कारण नकारात्मक विचार ऊर्जा का उत्पन्न होना है
आज मनुष्य गलत विचारों का भस्मासुर बना कर खुद का विनाश कर रहा है
मेरे मतानुसार कोरोना को मन से ना लगाओ
5 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक के लोग Negative हो रहे हैं
आकड़ों पर ना जाए ,आधे से ज्यादा लोग व्यवस्थित हैं; स्थिर मन:स्थिति से स्वस्थ हो रहे हैं ।
मृत्यु पाने वाले केवल कोरोना की वजह से नहीं बल्कि उन्हें अन्य बीमारियाँ भी थीं ,जिसका मुकाबला वे कर नहीं सके। ये याद रखें कोरोना की वजह से कोई भी घर पर नहीं मरा सबकी मृत्यु अस्पताल मे ही हुई
कारण, अस्पताल का वातावरण एवं मन का भय इसके लिए दोषी हैं । अपने विचार सकारात्मक रखें और आनंद से रहें। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि आप कोविड के नियमों का पालन न करें परन्तु स्वयं सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए औरों को भी सजग अवश्य करें परन्तु डर की भावना न भरें ।
धन्यवाद सहित
भवदीय
डॉक्टर मुरली सिंह
वरिष्ठ स्पीच थैरेपिस्ट जेनेसिस-न्यूरोजन स्पीच थेरेपी एवं हियरिंग ऐड सेंटर ऋषभ विहार दिल्ली-92





















