हे! सदी के काव्य साधक ध्यान रखना!
मर गयी यदि आत्मा तो क्या लिखोगे ?
तुम स्वयं के दर्द पर यदि चुप रहोगे,
कौन फिर पर (दूसरे) पीर को नव शब्द देगा ।
हाथ पर क्या? हाथ धरकर बैठने से,
ले सकोगे जो तुम्हें प्रारब्ध देगा ?
धार जिसकी काट दे शमशीर छल की,
जंग ऐसी तूलिका में लग न जाए।
इसीलिए मन पर नियंत्रण है जरूरी,
कामना कोई अनर्गल ठग ना जाए।
ध्यान रखना! रक्त बनकर बह रहा जो,
हो उसी का खात्मा तो क्या लिखोगे?
द्वेष और पाखंड लेकर क्यों खड़े हो,
हो सके तो शांति का संदेश दो तुम।
वृक्ष छायादार बनना है तुम्हें सो,
छांव की हर बाट को परिवेश दो तुम।
भेदना है चक्रव्यूहों को कलम से,
चक्रव्यूहों को नहीं रचना है तुमको।
इसलिए थोड़ी सजगता भी दिखाओ,
मित्र झूठे दंभ से बचना है तुमको।
जो रहा तुममें तुम्हारे प्रेम से वो,
खो गया परमात्मा तो क्या लिखोगे?
प्रेम ही जीवन है, प्रेम ही पूजा है!
~ आभा शर्मा





















