सत्यम् लाइव, 8 अगस्त 2020, दिल्ली।। गाय के दूध की प्रशांसा आदिकाल चली आ रही है दूसरेे नम्बर पर बकरी का दूध माना जाता है। राष्ट्र्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र हिसार में हलारी नस्ल की गधी के दूध की डेयरी शुरू होने जा रही है। इसके लिये एनआरसीई के 10 हलारी नस्ल की गधी मॅगवाई गयी हैं। गुजरात की हलारी नस्ल की गधी का दूध औषधियों का खजाना माना जाता है। यह बाजार में दो हजार से लेकर सात हजार रुपये लीटर तक में बिकता है। इससे कैंसर, मोटापा, एलर्जी जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है। इससे ब्यूटी प्रोडक्ट भी बनाए जाते हैं। इससे पहले 30 Dec 2013 के नव भारत टाइम्स में छपी खबर के हिसाब से, गधे के दूध पर सत्यवती के भरोसे से आयुर्वेद हेल्थ सेंटर श्रीनगर के सीनियर आयुर्वेद डॉक्टर वी. सुसीला भी इत्तेफाक रखते हैं। उन्होंने कहा कि गधे का दूध नवजात शिशुओं को अस्थमा, टीबी और गले के इन्फेक्शन से दूर रखने में सक्षम है विशाखापटनम जिले में डिपार्टमेंट ऑफ ऐनिमल हज्बंड्री के जॉइंट डायरेक्टर वेंकटेश्वर राव ने गधे के दूध की मेडिकल उपयोगिता के बारे में बताया कि यह पूरी तरह से ह्यूमन ब्रेस्ट दूध की तरह है। दोनों में तुलना किया जाए तो गधे का दूध फैट और प्रोटीन के मामले में ह्यूमन ब्रेस्ट दूध के मुकाबले कमजोर है, लेकिन लैक्टोस के मामले में इसका मुकाबला नहीं। हरियाणा में भी एनआरसीई के पूर्व डॉयरेक्टर डॉक्टर बीएन त्रिपाठी ने काम गधी के दूध पर शोध का कार्य प्रारम्भ किया है एनआरसीई की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर अनुराधा भारद्वाज के हिसाब से एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी एजीन तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में कई गंभीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित करते हैं। डॉ अनुराधा के शोध को केरल की एक कम्पनी ने खरीद कर ब्यूूूूटी प्रोडक्ट साबुन, लिप बाम, बॉडी लोशन तैयार किये जा रहेे हैं।
मंसूर आलम





















