कवि प्रदीप का मूल नाम ‘रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी’ था। उनका जन्म मध्य प्रदेश प्रांत के उज्जैन में बड़नगर नामक स्थान में हुआ। कवि एवं गीतकार थे जो देशभक्ति गीत ऐ मेरे वतन के लोगों की रचना के लिए प्रसिद्ध हैं। “दे दी हमें आज़ादी बिना खड़ग बिना ढ़ाल, साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल”। हिन्दी फ़िल्म जागृति (1954) का, द्वारा रचित एक गीत है। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की श्रद्धांजलि में ये गीत लिखा था। लता मंगेशकर द्वारा गाए इस गीत का तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की उपस्थिति में 26 जनवरी 1963 को दिल्ली के रामलीला मैदान में सीधा प्रसारण किया गया। जवाहरलाल नेहरू के आंख भर आए थे कवि प्रदीप ने इस गीत का राजस्व युद्ध विधवा कोष में जमा करने की अपील की। पांच दशक में कवि प्रदीप ने 71 फिल्मों के लिए 1700 गीत लिखे। जिसमें से प्रमुख गीत हैं ऐ मेरे वतन के लोगों”, “दूर हटो ऐ दुनियावालो हिंदुस्तान हमारा है”, “हर हर महादेव अल्लाह-ओ-अकबर” , “रामभरोसे मेरी गाड़ी”, “कान्हा बजाए बंसरी”, “जय जय राम रघुराई”, “कितना बदल गया इंसान”, “साबरमती के संत”, “हम लाये हैं तूफ़ान से” , “चलो चलें माँ”, “आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ”, “तेरे द्वार खड़ा भगवान”, “मुखड़ा देखले प्राणी”, “इन्सान का इंसान से हो भाईचारा”, “ओ अमीरों के परमेश्वर”, “जवानी में अकेलापन”, “ओ दिलदार बोलो एक बार”, “आज सुनो हम गीत विदा का गारहे”, “सांवरिया रे अपनी मीरा को भूल न जाना”, “न जाने कहाँ तुम थे”, “आजके इस इंसान को ये क्या होगया”, “सूरज रे जलते रहना”, “टूटगई है माला” “जन्मभूमि माँ”, “सुनो सुनो देशके हिन्दू – मुस्लमान”, “भारत के लिए भगवन का एक वरदान है गंगा”, “ये ख़ुशी लेके मैं क्या करूँ”, “चल अकेला चल अकेला”, “तुमको तो करोड़ों साल हुए” “जो दिया था तुमने एक दिन”, “अँधेरे में जो बैठे हो”, “सुख दुःख दोनों रहते” “हाय रे संजोग क्या घडी दिखलाई”, “चल मुसाफिर चल”, “जय जय नारायण नारायण हरी हरी” , “प्रभु के भरोसे हांको गाडी”, “मारनेवाला है भगवन बचानेवाला है भगवन”, “मैं इस पार”, “मैं तो आरती उतरूँ”, “यहाँ वहां जहाँ तहां”, “मत रो मत रो आज”, “करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं”, “मदद करो संतोषी माता”, “हे मारुती सारी रामकथा साकार”, “बंजा हूँ मैं” लिखे।
सुनील शुक्ल





















