प्राचीन शिव शक्ति दुर्गा मंदिर सेवा समिति ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी पंडित संतोष मिश्रा जी ने बताया कि खोड़ा वार्ड नं. 23, हिमालय एंक्लेव स्थित, प्राचीन शिव शक्ति दुर्गा मंदिर के प्रांगण में चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन गोवर्धन धाम से पधारे कथा व्यास श्री कृष्ण पवन शास्त्री जी के मुखारबिंद से मुख्य रूप से शुकदेव जी का आगमन, परीक्षित जी को श्राप, और भागवत महात्म्य की कथा सुनाई। इसमें राजा परीक्षित द्वारा शमीक ऋषि के गले में मृत सांप डालने, ऋषि पुत्र श्रृंगी द्वारा श्राप देने और शुकदेव मुनि के आगमन से ज्ञान-भक्ति की धारा प्रवाहित होने का वर्णन किया और कहा कि “बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई”। एक दिन प्यास से व्याकुल राजा परीक्षित का शमीक ऋषि के ध्यानमग्न होने पर अपमानित महसूस किया और कलियुग के प्रभाव में ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया । ऋंगी ऋषि द्वारा परीक्षित को 7 दिन में तक्षक नाग द्वारा डंसने (मृत्यु) का श्राप दे दिया।
राजा परीक्षित का अपनी गलती का एहसास हो गया और राज्य त्यागकर गंगा तट पर जाकर मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे। और भागवत महात्म्य में बताया गया कि भागवत कथा श्रवण से परीक्षित जैसे महान धर्मात्मा का भी कल्याण हो गया। इस कथा को सुनकर सभी श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए। इस मौके पर कथा के मुख्य यजमान श्रीमती मीरा गुप्ता धर्म पत्नी स्व. श्री राजेन्द्र कुमार गुप्ता, सुपुत्र श्री नितिन गुप्ता संग श्रीमती राखी गुप्ता, श्री डी. पी. उपाध्याय, हृदय राम मिश्रा, भोला पांडेय, डी.डी. तिवारी, परमात्मा यादव, सूरज सिंह कुशवाह, संतोष मिश्रा, रवि शर्मा, पिंटू पांडेय, अंकित गुप्ता, अनुज गुप्ता, अनमोल गुप्ता, शिव राम आदि मौजूद थे।





















