सत्यम् लाइव, 21 अप्रैल 2021, दिल्ली कोरोना वायरस के बढते कदम के कारण दिल्ली सरकार ने अगले 1 सप्ताह के लिये लॉकडाउन लगा दिया है और लगातार से यह बताया गया कि दिल्ली के व्यापार मण्डल ने ऐसी मॉग की है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया जी दिल्ली में आक्सीजन सिलेण्डर को लेकर बार बार ट्वीट करके सूचना देते भी नजर आ रहे हैं।उसी ऑक्सीजन की पूर्ति के लिये जब दिल्ली के पार्को में माताऐं, बहनों सहित परिवार जब पार्क में आकर प्राणायाम, योग कर रहे हैं
तो पुलिस उन्हें वहॉ से भगा रही है और साथ में धमकी भरे शब्द होते हैं कि कल से आये तो समझ लेना। ये सब वो प्राणायाम करने वाले लोग हैं जो बाबा रामदेव केे शिविर में जाकर भी योग करते हैंं और समय समय पर समाज को किसी भी समस्या से निजात दिलाने के लिये प्रयासरत हैं। दस साल से लगातार सेवा निशुल्क सेवा कार्य में लगे हुए व्यक्ति से ऐसा व्यवहार वो पुलिस कर रही है जिसके दिल्ली के मुख्यमंत्री जी कहते हैंं कि केन्द्र सरकार के अण्डर में है परन्तु सब कार्यो में आदेश उन्हीं का मानती हैै।
भारतीय शास्त्रोंं को सच में आज की शासन और प्रशासन ने गलत साबित करने का बेडा उठा रखा है। बाबा रामदेव द्वारा कहे गये शब्द ”करो योग रहो निरोग” जो भारतीय शास्त्रोंं के अनुसार भारत के व्यक्ति को जाग्रत करने के लिये कांग्रेस के समय में फैलाये गये थे वो भी अब गलत साबित करने में आज के प्रशासन व्यवस्था लगी हुई है।
ये पूरी घटना आज लोनी गोल चक्कर के पास वाले सेण्टल पार्क की है जिसमें पार्क में बैठकर प्राणायाम, योग करने वाले माताओं, बहनों सहित समस्त उन व्यक्तियों के साथ घटी जो पिछले 15 सालों से उसी पार्क में बैठकर योग करते है और कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य की समस्या से ग्रसित हो तो राजीव दीक्षित के बताये गये आयुर्वेद के अनुसार रसोई चिकित्सा भी उसे समझाते हैं।
ऑक्सीजन की समस्या से निपटने के लिये यदि भारतीय शास्त्रों केे अनुसार उपाय नहीं किये जायेगें तब तो सच में व्यक्ति बेमौत मरेगा। प्रात:काल यदि खुले मैदान में दिल्ली में सॉस नहीं ले सकता है व्यक्ति, तो कभी भी ये समस्या समाप्त नहीं हो सकती है। पंचाग को अन्धविश्वास कहकर हम सब अपनेे वनस्पति के पॉच अंगों को यदि नकारते रहे तो निश्चित ही एक बडी गम्भीर समस्या का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं। अब खुलेआम जनता कहने लगी है कि इस समस्या का पालन पोषण शासन और प्रशासन स्वयं कर रहा है।
सुनील शुक्ल





















