सत्यम् लाइव, 1 जून 2021, दिल्ली।। पिछले वर्ष 26 मई 2021 को अम्फान चक्रवात के बाद, 2021 मई में आये तो तूफान पहला गोवा, मुम्बई, गुजरात में ताण्डव करता हुआ पहले ही क्षेत्र पर अपना प्रभाव जमाये था इसके लगभग 7 दिनों के बाद ही, यास चक्रवात ने जो ताण्डव किया है उसने तो पूरे देश की स्थितियों पर समीक्षा करने के सिवा कुछ शेष नहीं रह गया है। ये बात अलग है कि जितना मीडिया और सरकारों ने उत्तरायण काल में जिसे देवताओं का काल कहा गया है उसमें वायरस पर हल्ला मचाया है उसका एक प्रतिशत भी चक्रवात पर किसी ने कुछ नहीं कहा और न ही किसी का ध्यान है।
अगर ऐसे ही कलम सत्य बोले तो ये कहा जा सकता हैै कि प्रायोजित कार्यक्रम करना और आपदा में कार्य करना दो अलग बाते हैं क्योंकि जब कुछ प्रायोजित होता है तो आदेश का पालन करना होता है और जब आपदा होती है तब तत्काल निर्णय स्वयं को लेना होता है। अब यहॉ से साफ नजर आता है प्राकृतिक आपदा कभी भी अवसर खोजने का मौका नहीं देती हैै ऐसा ही चक्रवात के दौरान हुआ था जबकि पहले से ये तय था कि लगभग इस समय चक्रवात यहॉ से होकर गुजरेगा परन्तु सारे बचाव के बावजूद भी प्रलयंकारी ने अपना ताण्डव प्रबलता के साथ दिखाया।
और कम से कम 1 लाख परिवारों को तो नुकसान पहुॅचाया और वो ऐसा नुकसान जिसकी भरपाई पूरे जीवन नहीं कर पायेगें। साथ में मौसम नेे एक तरफ रिकार्ड बनाया कि उत्तरायण काल में इतनी कमी गर्मी होने का तो दूसरी तरफ उत्तरायण काल में पिछले 55 साल का रिकार्ड तोडकर बारिश होने का। लू का प्रकोप तो न के बराबर ही है परन्तु बीच बीच में तपन ऐसी ज्यादा होती है कि अचानक ही व्यक्ति को बीमार कर सकती है। अत: आयुर्वेद के अनुसार अपने शरीर मेें जल और अग्नि तत्व का समन्वय बनाकर रखें।
सुनील शुक्ल





















