• About
  • Team
  • Contact
  • E-Paper
  • Advertisement
  • Print and Digital Media Consultancy
Saturday, September 5, 2026
Satyam Live
Advertisement
  • होम
  • विदेश
  • भारत
  • राज्य
    • दिल्ली
    • एन.सी.आर
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
  • विशेष
  • राजनीति
  • क्राइम
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • करियर
  • खेल
  • धर्म
  • सोशल
  • टेक्नोलॉजी
  • लाइफस्टाइल
  • वीडियो
No Result
View All Result
  • होम
  • विदेश
  • भारत
  • राज्य
    • दिल्ली
    • एन.सी.आर
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
  • विशेष
  • राजनीति
  • क्राइम
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • करियर
  • खेल
  • धर्म
  • सोशल
  • टेक्नोलॉजी
  • लाइफस्टाइल
  • वीडियो
No Result
View All Result
Satyam Live
Home उत्तराखंड

जीवन में पूर्णता लाते हैं गुरु

SATYAM LIVE (Web Desk) by SATYAM LIVE (Web Desk)
July 25, 2018
in उत्तराखंड
5.5k 56
A A
0
Share on WhatsaapShare on FacebookShare on TwitterShare on LinkedInShare on Telegram
दिल्ली:  भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है, यह अध्यात्म-जगत की सबसे बड़ी घटना के रूप में जाना जाता है। पश्चिमी देशों में गुरु का कोई महत्व नहीं है, वहां विज्ञान और विज्ञापन का महत्व है परन्तु भारत में सदियों से गुरु का महत्व रहा है। यहां की माटी एवं जनजीवन में गुरु को ईश्वरतुल्य माना गया है, क्योंकि गुरु न हो तो ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग कौन दिखायेगा? गुरु ही शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और वे ही जीवन को ऊर्जामय बनाते हैं।

 

 जीवन विकास के लिए भारतीय संस्कृति में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई है। गुरु की सन्निधि, प्रवचन, आशीर्वाद और अनुग्रह जिसे भी भाग्य से मिल जाए उसका तो जीवन कृतार्थता से भर उठता है। क्योंकि गुरु बिना न आत्म-दर्शन होता और न परमात्म-दर्शन। इन्हीं की प्रेरणा से आत्मा चैतन्यमय बनती है। गुरु भवसागर पार पाने में नाविक का दायित्व निभाते हैं। वे हितचिंतक, मार्गदर्शक, विकास प्रेरक एवं विघ्नविनाशक होते हैं। उनका जीवन शिष्य के लिये आदर्श बनता है। उनकी सीख जीवन का उद्देश्य बनती है। अनुभवी आचार्यों ने भी गुरु की महत्ता का प्रतिपादन करते हुए लिखा है- गुरु यानी वह अर्हता जो अंधकार में दीप, समुद्र में द्वीप, मरुस्थल में वृक्ष और हिमखण्डों के बीच अग्नि की उपमा को सार्थकता प्रदान कर सके।

 

यें भीपढ़ें :-

जल प्रलय: उप्र में सम्भावित स्थिति के कारण सतर्कता

आस्था, परंपरा और प्रगति: उत्तराखंड की इस अनोखी होली ने जीता सबका दिल, पारंपरिक वेशभूषा में लोक कलाकारों ने बांधा समां

नीरज : सतरंगी रेखाओं की सादी तस्वीर

आषाढ़ की समाप्ति और श्रावण के आरंभ की संधि को आषाढ़ी पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा अथवा गुरु पूर्णिमा कहते हैं। गुरु पूर्णिमा आत्म-बोध की प्रेरणा का शुभ त्योहार है। यह त्योहार गुरु-शिष्य के आत्मीय संबंधों को सचेतन व्याख्या देता है। काव्यात्मक भाषा में कहा गया है- गुरु पूर्णिमा के चांद जैसा और शिष्य आषाढ़ी बादल जैसा। गुरु के पास चांद की तरह जीए गये अनुभवों का अक्षय कोष होता है। इसीलिये इस दिन गुरु की पूजा की जाती है इसलिए इसे ‘गुरु पूजा दिवस’ भी कहा जाता है। प्राचीन काल में विद्यार्थियों से शुल्क नहीं वसूला जाता था अतः वे साल में एक दिन गुरु की पूजा करके अपने सामथ्र्य के अनुसार उन्हें दक्षिणा देते थे। महाभारत काल से पहले यह प्रथा प्रचलित थी लेकिन धीरे-धीरे गुरु-शिष्य संबंधों में बदलाव आ गया। कहा गया है कि अगर आप गुरु की ओर एक कदम बढ़ाते हैं तो गुरु आपकी ओर सौ कदम बढ़ाते हैं। कदम आपको ही उठाना होगा, क्यों यह कदम आपके जीवन को पूर्णता प्रदत्त करता है।

 

भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत ऊंचा और आदर का स्थान है। माता-पिता के समान गुरु का भी बहुत आदर रहा है और वे शुरू से ही पूज्य समझे जाते रहे है। गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश के समान समझ कर सम्मान करने की पद्धति पुरातन है। ‘आचार्य देवोभवः’ का स्पष्ट अनुदेश भारत की पुनीत परंपरा है और वेद आदि ग्रंथों का अनुपम आदेश है। ऐसी मान्यता है कि हरिशयनी एकादशी के बाद सभी देवी-देवता चार मास के लिए सो जाते है। इसलिए हरिशयनी एकादशी के बाद पथ प्रदर्शक गुरु की शरण में जाना आवश्यक हो जाता है। परमात्मा की ओर संकेत करने वाले गुरु ही होते हंै। गुरु एक तरह का बांध है जो परमात्मा और संसार के बीच और शिष्य और भगवान के बीच सेतु का काम करते हैं। इन गुरुओं की छत्रछाया में से निकलने वाले कपिल, कणाद, गौतम, पाणिनी आदि अपने विद्या वैभव के लिए आज भी संसार में प्रसिद्ध है। गुरुओं के शांत पवित्र आश्रम में बैठकर अध्ययन करने वाले शिष्यों की बुद्धि भी तद्नुकूल उज्ज्वल और उदात्त हुआ करती थी। सादा जीवन, उच्च विचार गुरुजनों का मूल मंत्र था। तप और त्याग ही उनका पवित्र ध्येय था। लोकहित के लिए अपने जीवन का बलिदान कर देना और शिक्षा ही उनका जीवन आदर्श हुआ करता था। प्राचीन काल में गुरु ही शिष्य को सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों तरह का ज्ञान देते थे लेकिन आज वक्त बदल गया है। आजकल विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा देने वाले शिक्षक को और लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान देने वाले को गुरु कहा जाता है। शिक्षक कई हो सकते है लेकिन गुरु एक ही होते है। हमारे धर्मग्रंथों में गुरु शब्द की व्याख्या करते हुए लिखा गया है कि जो शिष्य के कानों में ज्ञान रूपी अमृत का सींचन करे और धर्म का रहस्योद्घाटन करे, वही गुरु है। यह जरूरी नहीं है कि हम किसी व्यक्ति को ही अपना गुरु बनाएं। योग दर्शन नामक पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण को जगतगुरु कहा गया है क्योंकि महाभारत के युद्ध के दौरान उन्होंने अर्जुन को कर्मयोग का उपदेश दिया था। माता-पिता केवल हमारे शरीर की उत्पत्ति के कारण है लेकिन हमारे जीवन को सुसंस्कृत करके उसे सर्वांग सुंदर बनाने का कार्य गुरु या आचार्य का ही है।

 

पहले गुरु उसे कहते थे जो विद्यार्थी को विद्या और अविद्या अर्थात आत्मज्ञान और सांसारिक ज्ञान दोनों का बोध कराते थे लेकिन बाद में आत्मज्ञान के लिए गुरु और सांसारिक ज्ञान के लिए आचार्य-ये दो पद अलग-अलग हो गए। भारत के महान् दार्शनिक ओशो ने जब यह कहा कि हमारी शिक्षण संस्थाएं अविद्या का प्रचार कर रही हैं तो लोगों ने आपत्ति की लेकिन वे बात सही कह रहे थे। आज हमारे विद्यालयों में ज्ञान का नहीं बल्कि सूचनाओं का हस्तांतरण हो रहा है। विद्यार्थियों का ज्ञान से अब कोई वास्ता नहीं रहा इसलिए आज हमारे पास डाॅक्टर, इंजीनियर, वकील, न्यायाधीश, वैज्ञानिक और वास्तुकारों की तो एक बड़ी भीड़ जमा है लेकिन ज्ञान के अभाव में चरित्र और चरित्र के बिना सुंदर समाज की कल्पना दिवास्वप्न बन कर रह गई है।

 

शिक्षा का संबंध यदि चरित्र के साथ न रहा तो उसका परिणाम यही होगा। परंतु इस मूल प्रश्न की ओर कौन ध्यान दे? सत्ताधारी लोग अपने पद को बनाये रखने के लिए शिक्षा का संबंध चरित्र की बजाय रोजगार से जोड़ना चाहते हैं। जो लोग शिक्षा का संबंध रोजगार से जोड़ने की वकालत करते हैं वे वस्तुतः शताब्दियों तक अपने लिए राज करने की भूमिका तैयार कर रहे हैं और उनके तर्क इतने आकट्य हैं कि सामान्य व्यक्ति को महसूस होता है कि समाज के सबसे अधिक हिंतचिंतक यही लोग हैं। यही कारण है कि देश में आज जिस तरह का माहौल बनता जा रहा है, अनैतिकता और अराजकता फैलती जा रही है, हिंसा और आतंक बढ़ता जा रहा है, भ्रष्टाचार और अपराध जीवनशैली बन गयी है। इसका मूल कारण गुरु को नकारकर, चरित्र को नकारकर हमने केवल भौतिकता को जीवन का आधार बना लिया है।

 

पिछले सात दशक से हम उल्टी गिनती गिन रहे हैं। उसी का परिणाम है कि न पानी की समस्या सुलझी न रोजी-रोटी की। न उन्नत चिकित्सा सुलभ हो पा रही है न शिक्षा को उन्नत बना पाये है। चंद लोगों की भव्य अट्टालिकाएं अवश्य खड़ी हो गई हैं। यदि हमें भारत में लोकतांत्रिक पद्धति को सफल बनाना है तो चरित्र उसकी पहली शर्त है। महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि हम हिंदुस्तान में कौन-साी पद्धति लागू करें बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हम चरित्रवान व्यक्ति पैदा करें।

 

पाठ्य पुस्तकों में कुछ नीतिपरक श्लोकों को जोड़ने अथवा बच्चों को तोते की तरह गायत्री मंत्र रटाने या अंग्रेजी शैली में योग को ‘योगा’ करने से न तो चरित्र निर्माण होता है और न भावी पीढ़ी में ज्ञान का हस्तांतरण ही संभव है। ज्ञान तो गुरु से ही प्राप्त हो सकता है लेकिन गुरु मिलें कहां? अब तो ट्यूटर हैं, टीचर हैं, प्रोफेसर हैं पर गुरु नदारद हैं। गुरु के प्रति अविचल आस्था ही वह द्वार है जिससे ज्ञान का हस्तांतरण संभव है। हमें इन तथ्यों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह सच है कि आज हम जिस सामाजिक और आर्थिक परिवेश में सांस ले रहे हैं वहां इन पुरानी व्यवस्थाओं की चर्चा निरर्थक है परंतु इनके सार्थक और शाश्वत अंशों को तो हम ग्रहण कर ही सकते हैं।

 

सिर्फ धन कमाने या रोजी-रोटी चला लेने से मनुष्य जीवन में सुखी नहीं रह सकता। यह सुखी रहने का बाहरी भौतिक उपाय है। अपनी आत्मा को जानना और भगवान को पाना ही सच्चा सुख है। यद्यपि गुरुओं के महागुरु भगवान स्वयं प्रत्येक व्यक्ति के हृदय-गुहा में विराजमान हैं तथापि बिना किसी बाहर के योग्य गुरु की मदद के हम अपनी आत्मा को नहीं जान सकते। यह आध्यात्मिक गुरु ही अन्तरात्मा के बंद द्वार खोलता है और हमें भगवान से साक्षात्कार कराता है। माँ का ज्ञान और शिक्षक द्वारा दिया गया ज्ञान बाहर का ज्ञान है, वस्तुओं का ज्ञान है परन्तु आध्यात्मिक गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान आंतरिक ज्ञान है। वह भीतर के अंधकार को दूर कर उसे प्रकाशित करता है। बाहर की वस्तुओं का कितना भी हमें ज्ञान प्राप्त हो जाए हम कितने भी बड़े पद पर हों, कितना भी हमारे पास पैसा हो परन्तु बिना भीतर के ज्ञान सब कुछ व्यर्थ है। बाहरी ज्ञान, मन-बुद्धि का ज्ञान-विज्ञान है परन्तु आध्यात्मिक ज्ञान मन से परे भगवान का ज्ञान है। परन्तु विडम्बना यह है कि जिस प्रकार गुरु रूपी माँ की महिमा और सम्मान में गिरावट आई है, रोजगार दिलाने वाले शिक्षकों का अवमूल्यन हुआ है। उसी प्रकार भगवान से मिलाने वाले आध्यात्मिक गुरुओं का भी अवमूल्यन हो रहा है। आज नकली, धूर्त, ढोंगी, पाखंडी, साधु-संन्यासियों और गुरुओं की बाढ़ ने असली गुरु की महिमा को घटा दिया है। असली गुरु की पहचान करना बहुत कठिन हो गया है। भगवान से मिलाने के नाम पर, मोक्ष और मुक्ति दिलाने के नाम पर, कुण्डलिनी जागृति के नाम पर, पाप और दुःख काटने के नाम पर, रोग-व्याधियां दूर करने के नाम पर और जीवन में सुख और सफलता दिलाने के नाम पर हजारों धोखेबाज गुरु पैदा हो गये हैं जिनको वास्तव में कोई आध्यात्मिक उपलब्धि नहीं है।

 

जो स्वयं आत्मा को नहीं जानते वे दूसरों को आत्मा पाने का गुर बताते हैं। तरह-तरह के प्रलोभन देकर धन कमाने के लिए शिष्यों की संख्या बढ़ाते हैं। जिसके बाड़े में जितने अधिक शिष्य हों वह उतना ही बड़ा और सिद्ध गुरु कहलाता है। मूर्ख भोली-भाली जनता इनके पीछे-पीछे भागती है और दान-दक्षिणा देती है। ऐसे धन-लोलुप अज्ञानी और पाखंडी गुरुओं से हमें सदा सावधान रहना चाहिए। कहावत है कि ‘पानी पीजै छान के और गुरु कीजै जान के।’ सच्चा गुरु ही भगवान तुल्य है। इसीलिए कहा गया है कि ‘गुरु-गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपनो जिन गोविंद दियो मिलाय।’ यानी भगवान से भी अधिक महत्व गुरु को दिया गया है। यदि गुरु रास्ता न बताये तो हम भगवान तक नहीं पहुंच सकते। अतः सच्चा गुरु मिलने पर उनके चरणों में सब कुछ न्यौछावर कर दीजिये। उनके उपदेशों को अक्षरशः मानिये और जीवन में उतारिये। सभी मनुष्य अपने भीतर बैठे इस परम गुरु को जगायें। यही गुरु-पूर्णिमा की सार्थकता है तथा इसी के साथ अपने गुरु का भी सम्मान करें।

 

प्रेषक
(ललित गर्ग)
SendShare1875Tweet1172Share328Share
Advertisement Advertisement Advertisement
ADVERTISEMENT
SATYAM LIVE (Web Desk)

SATYAM LIVE (Web Desk)

सम्बंधित ख़बरें :-

उत्तराखंड

नैनीताल पर ‘जल प्रलय’ का खतरा! चूहों के बाद अब मछलियां भी काट रही हैं नैनी झील की जड़ें; माल रोड धंसने की बड़ी चेतावनी

March 10, 2026
5.9k
उत्तराखंड

Nainital Crime News: नैनीताल घूमने गई दिल्ली की महिला पर्यटक के साथ कैब ड्राइवर की हैवानियत, चलती कार से कूदकर बचाई आबरू

March 8, 2026
5.9k
उत्तराखंड

धराली में क्यों आया था भयंकर जलप्रलय? ISRO की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, गई थी 68 की जान

March 7, 2026
5.9k
उत्तराखंड

उत्तराखंड ने फिर मारी बाजी! नए कानून लागू करने में देश के सभी राज्यों को पछाड़ा, बना ‘टॉप स्टेट’

March 7, 2026
5.9k
उत्तराखंड

Shahbaz Confession Wife Murder Case: ‘मैं कहकशा को पसंद नहीं करता था…’, शादी के 4 महीने बाद ही शहबाज ने पत्नी को उतारा मौत के घाट; खौफनाक कबूलनामा

March 6, 2026
5.9k
उत्तराखंड

उत्तराखंड की नई पहचान! टिहरी झील को स्पोर्ट्स और टूरिज्म केंद्र बनाने के लिए ₹1300 करोड़ की बड़ी योजना

March 6, 2026
5.9k
उत्तराखंड

Chardham Yatra 2026 Registration Opens: चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें केदारनाथ-बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तारीख और आवेदन का तरीका

March 6, 2026
5.9k
उत्तराखंड

रुद्रपुर में तनाव! नमाजी से मारपीट के बाद अटरिया मंदिर प्रबंधक का एक और वीडियो वायरल, क्या और गहराएगी कानूनी मुश्किलें?

March 5, 2026
5.9k
उत्तराखंड

आस्था, परंपरा और प्रगति: उत्तराखंड की इस अनोखी होली ने जीता सबका दिल, पारंपरिक वेशभूषा में लोक कलाकारों ने बांधा समां

March 5, 2026
5.9k
उत्तराखंड

Haridwar News: हरिद्वार में होली पर खूनी संघर्ष, 50 लोगों ने मिलकर किया हमला, इलाके में भारी तनाव

March 5, 2026
5.9k
उत्तराखंड

Uttarakhand News: कोटद्वार के युवक से मुलाकात के बाद चर्चा में राहुल गांधी, दीपक कुमार ने जिम मेंबरशिप को लेकर किया बड़ा दावा

February 23, 2026
5.9k
उत्तराखंड

Haridwar Kumbh 2027: कुंभ मेले की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, ग्राउंड जीरो पर उतरीं मेलाधिकारी, घाटों और सड़कों का निरीक्षण

February 17, 2026
5.9k
  • Trending
  • Comments
  • Latest

योग्य संतान की प्राप्ति के लिए गर्भाधान कब करे और कब पत्नी से दूर रहें! जानिए..

March 4, 2017

गाजियाबाद के ऋषभांचल पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

August 15, 2026

क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा पंचतत्व …..

July 26, 2021

नई दिल्ली में गौरव सम्मान समारोह-2026, समाजसेवा से विज्ञान तक 50 से अधिक प्रतिभाओं का अभिनंदन

August 24, 2026

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ा संकट: IAEA ने माना नियमों का पालन नहीं, क्या अब लगेगा प्रतिबंध?

September 5, 2026

CM मोहन यादव आज करेंगे इंदौर मेट्रो का शुभारंभ, 16 स्टेशनों तक पहुंचेगी सेवा

September 5, 2026

महाराष्ट्र में महिला पहलवान की मौत मामले में नया मोड़: पति-ससुर समेत 4 पर FIR, दहेज प्रताड़ना के आरोप

September 5, 2026

बेंगलुरु में कर्ज वसूली का खौफनाक मामला: महिला को बंधक बनाकर निर्वस्त्र वीडियो बनाने का आरोप

September 5, 2026
ADVERTISEMENT

Stay Connected

  • 78.7k Fans
  • 76.5k Followers
  • 76.9k Followers
  • 56.8k Subscribers
  • 678.6k Followers
  • 67.9k Subscribers
ADVERTISEMENT

Popular Stories

  • योग्य संतान की प्राप्ति के लिए गर्भाधान कब करे और कब पत्नी से दूर रहें! जानिए..

    10575 shares
    Share 4230 Tweet 2644
  • क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा पंचतत्व …..

    7045 shares
    Share 2818 Tweet 1761
  • Holi Special Train 2026: होली के लिए ट्रेनों में शुरू हुई एडवांस बुकिंग, प्रमुख रूटों पर सीटें फुल; जानें कैसे मिलेगा कंफर्म टिकट

    5693 shares
    Share 2277 Tweet 1423
  • UP RTE Admission 2026-27: यूपी के प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन शुरू, आज ही करें ऑनलाइन आवेदन; जानें पूरी प्रक्रिया

    5615 shares
    Share 2246 Tweet 1404
  • Dr. Dharmendra Shastri Chandigarh: 32 वर्षों की सेवा में संस्कृत शिक्षा, स्कूल विकास और समाजसेवा में अद्वितीय योगदान | State Award Winner 2025

    5494 shares
    Share 2198 Tweet 1374
ADVERTISEMENT
Advertisement Advertisement Advertisement
ADVERTISEMENT
Satyam Live

Satyam Live is a National Hindi Newspaper | Magazine | Web Portal | Web Channel & News Media Organization to deliver credible and insightful journalism.

Follow Us

Browse by Category

  • ई-पेपर
  • ई-मैगज़ीन
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • एन.सी.आर
  • करियर
  • क्राइम
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी & AI
  • दिल्ली
  • धर्म
  • पंजाब
  • बिज़नेस
  • भारत
  • मध्य प्रदेश
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • लाइफस्टाइल
  • विज्ञापन
  • विदेश
  • विशेष
  • वीडियो
  • समीक्षा
  • सम्पादकीय
  • सोशल
  • हरियाणा
  • हेल्थ

Recent News

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ा संकट: IAEA ने माना नियमों का पालन नहीं, क्या अब लगेगा प्रतिबंध?

September 5, 2026

CM मोहन यादव आज करेंगे इंदौर मेट्रो का शुभारंभ, 16 स्टेशनों तक पहुंचेगी सेवा

September 5, 2026
  • Home
  • About
  • Team
  • Advertise
  • Contact
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Print and Digital Media Consultancy

© 2026 "SATYAM LIVE - Where Truth Meets Every Story" by SATYAM LIVE.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • होम
  • विदेश
  • भारत
  • राज्य
    • दिल्ली
    • एन.सी.आर
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
  • विशेष
  • राजनीति
  • क्राइम
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • करियर
  • खेल
  • धर्म
  • सोशल
  • टेक्नोलॉजी
  • लाइफस्टाइल
  • वीडियो
  • ई-पेपर

© 2026 "SATYAM LIVE - Where Truth Meets Every Story" by SATYAM LIVE.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.