मानसून की बारिश दिल्ली-NCR की प्रदूषित हवा को कुछ समय के लिए राहत जरूर देती है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक कायम नहीं रहता। बारिश थमने के बाद हवा में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगता है। इस साल मानसून के 92 दिनों में दिल्ली को सिर्फ एक दिन अच्छी वायु गुणवत्ता मिली। वहीं, बारिश के बाद PM2.5 का स्तर भी तेजी से बढ़ा और 48 घंटे के भीतर इसमें 37.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
मानसून की विदाई के साथ अब सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका ने दिल्ली-NCR की चिंता बढ़ा दी है। सर्दियों के दौरान हवा की धीमी गति और अन्य मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक लंबे समय तक वातावरण में बने रह सकते हैं।
92 दिनों में सिर्फ एक दिन रही हवा अच्छी
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट के मुताबिक, जून से अगस्त 2026 के बीच दिल्ली में कुल 576.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद मानसून के 92 दिनों में सिर्फ 9 जुलाई को वायु गुणवत्ता ‘अच्छी’ श्रेणी में पहुंची।
9 जुलाई को सफदरजंग और पालम मौसम केंद्रों पर दर्ज बारिश का संयुक्त औसत 67.75 मिलीमीटर रहा। बारिश के कारण उस दिन हवा की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला।
सबसे ज्यादा बारिश के बावजूद हवा नहीं हुई ‘अच्छी’
रिपोर्ट के अनुसार, 8 अगस्त को दिल्ली में मानसून की एक दिन की सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। उस दिन बारिश का आंकड़ा 101.05 मिलीमीटर रहा। हालांकि, इतनी अधिक बारिश के बावजूद वायु गुणवत्ता केवल ‘संतोषजनक’ श्रेणी तक ही पहुंच सकी।
यह आंकड़े बताते हैं कि बारिश प्रदूषण को अस्थायी रूप से कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन अकेले बारिश के भरोसे दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
सर्दियों में बढ़ सकती है चुनौती
मानसून के खत्म होने के बाद तापमान और मौसम में बदलाव के साथ दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की चुनौती बढ़ने की आशंका है। PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों का स्तर बढ़ना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए चिंता का विषय है।
ऐसे में मानसून के बाद प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना और सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण से निपटने की तैयारी करना दिल्ली-NCR के लिए महत्वपूर्ण होगा।



















