भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में मध्यप्रदेश के डेयरी और पशुपालन क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में दुग्ध संघों के सदस्यों, गोपालकों और गौशालाओं को आर्थिक सहायता भी वितरित की गई। सम्मेलन में 35 हजार से अधिक गोपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में अमित शाह का स्वागत किया। शाह ने भेल दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। प्रदर्शनी में नए कानूनों के तहत पुलिस जांच, फोरेंसिक साक्ष्य, डिजिटल तकनीक और न्याय प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं को प्रदर्शित किया जा रहा है।
‘नई न्याय व्यवस्था का केंद्र नागरिक’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि पहले देश की न्याय व्यवस्था को लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों और ‘तारीख पर तारीख’ के लिए जाना जाता था। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद सरकार का लक्ष्य है कि किसी मामले में एफआईआर दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दोषी को तीन साल के भीतर सजा दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
शाह ने कहा कि अंग्रेजों के दौर में बनाए गए कानूनों का उद्देश्य तत्कालीन सरकार और प्रशासन के हितों की रक्षा करना था, जबकि नए कानूनों का केंद्र भारत के नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में नागरिकों के सम्मान, संपत्ति और शरीर की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
‘दंड नहीं, न्याय सुनिश्चित करना उद्देश्य’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नई न्याय व्यवस्था का मूल उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि नागरिकों को समयबद्ध तरीके से न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने नए कानूनों को आधुनिक आपराधिक न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
भोपाल में शुरू हुई राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में अपराध की सूचना मिलने से लेकर जांच, साक्ष्य जुटाने, फोरेंसिक जांच और अदालत में सुनवाई तक की प्रक्रिया को अलग-अलग माध्यमों से प्रदर्शित किया जा रहा है।
डेयरी सेक्टर को भी मिली कई सौगातें
गोपालक सम्मेलन में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं की शुरुआत की गई। इनमें उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित डेयरी प्लांट का भूमिपूजन भी शामिल है। इसके अलावा गोपालकों, दुग्ध सहकारी समितियों और गौशालाओं के लिए वित्तीय सहायता का वितरण किया गया।
सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य मध्यप्रदेश में दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने, दुग्ध उत्पादों में वैल्यू एडिशन और पशुपालकों की आय के अवसरों को मजबूत करना है।

















