उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मध्य प्रदेश के मंदसौर तक पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में मंदसौर जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और मामले को लेकर जमकर नारेबाजी की। इसके बाद उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद सभा स्थल को कथित तौर पर शुद्ध किए जाने की घटना से हुई। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए इसे सामाजिक और जातिगत भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
पार्टी के मुताबिक, राहुल गांधी ने भी इस मामले को लेकर आवाज उठाई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर कांग्रेस ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी के खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। इसी के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मंदसौर में प्रदर्शन किया।
एसपी कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर जमकर नारे लगाए। जब अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञापन लेने के लिए वहां पहुंचे, तो उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कार्यालय की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
इस दौरान प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच कुछ देर के लिए तनातनी जैसी स्थिति बन गई। कार्यकर्ताओं ने ‘भारत माता की जय’ और ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। इसके बाद कुछ कार्यकर्ता कार्यालय के बाहर धरने पर भी बैठ गए।
बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन का वाचन किया और उसे एएसपी को सौंप दिया।
कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापन के माध्यम से राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर पुनर्विचार करने और मामले में उचित कार्रवाई की मांग उठाई है।


























