मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरा के अवसर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1800 किलोमीटर की ‘सत्य, सनातन, स्वाभिमान यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं। यह यात्रा मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से होकर गुजरेगी। दिग्विजय सिंह ने इसे गैर-राजनीतिक यात्रा बताया है।
उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का संदेश लोगों तक पहुंचाना है। यात्रा के दौरान वे रोजाना करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।
MP और UP से होकर गुजरेगी यात्रा
दिग्विजय सिंह के मुताबिक यात्रा का लगभग आधा हिस्सा मध्यप्रदेश और आधा उत्तरप्रदेश में होगा। उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं है, इसलिए वहां भी लोगों के बीच जाकर यात्रा के उद्देश्यों और विचारों को रखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सनातन धर्म, राम मंदिर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, नियुक्तियों, मतदाता सूची, चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए जाएंगे।
‘मेरा सनातन गांधी का है’
यात्रा के विचार और अपनी धार्मिक मान्यताओं को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे गांधीवादी विचारधारा में विश्वास करते हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से उनकी कभी सहमति नहीं रही।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सबसे बड़े सनातनी थे। उनके अनुसार सनातन धर्म बेहद पुराना है, हालांकि बाद के समय में इसे हिंदू धर्म के नाम से भी संबोधित किया जाने लगा।
धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल के खिलाफ होने की बात
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन पर अक्सर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन वे स्वयं को सनातन परंपरा और गांधीवादी विचारों से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने कहा कि वे सत्य और अहिंसा में विश्वास रखते हैं तथा धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल के विरोधी हैं।
उनके मुताबिक ‘सत्य, सनातन, स्वाभिमान यात्रा’ के जरिए वे लोगों के बीच सत्य, न्याय और अहिंसा का संदेश पहुंचाने का प्रयास करेंगे।




















