योगेश कुमार सोनी, पूर्वी दिल्ली | दिल्ली के गांधी नगर स्थित सुभाष रोड मार्केट में इंसानियत और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने यह दिखाया कि मुश्किल समय में यदि लोग मदद के लिए आगे आएं तो किसी जरूरतमंद की परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
एटा के डुमरी गांव की रहने वाली नन्ही घरेलू हिंसा और आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने बच्चों और परिवार का जीवन संभालने तथा आत्मनिर्भर बनने का प्रयास कर रही हैं। उनके पास अपना मकान नहीं है और आय का भी कोई स्थायी साधन नहीं है। उनके अनुसार, पति की ओर से भी उन्हें सहयोग के बजाय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है।
उधार लेकर परिवार का सामान खरीदने पहुंचीं गांधी नगर
परिस्थितियों के सामने हार न मानते हुए नन्ही ने अपने पड़ोस से कुछ पैसे उधार लिए और परिवार के लिए आवश्यक सामान खरीदने गांधी नगर की सुभाष रोड मार्केट पहुंचीं।
सुबह करीब सात बजे मार्केट पूरी तरह खुली भी नहीं थी। उन्होंने कुछ दुकानों से सामान खरीदा और एक दुकान पर अपना सामान रख दिया, ताकि आगे की दुकानों से खरीदारी करने के बाद सभी सामान को एक साथ ले जा सकें।
लेकिन कुछ देर बाद जब पूरी मार्केट खुली और नन्ही सामान लेने वापस पहुंचीं तो उन्हें याद नहीं रहा कि उन्होंने अपना सामान किस दुकान पर रखा था।
अजनबी शहर में सामान तलाशती रहीं नन्ही
अजनबी शहर, सीमित पैसे और सामने खड़ी परेशानी ने नन्ही की मुश्किल बढ़ा दी। वह रोते हुए पूरी मार्केट में अपने सामान और उस दुकान को तलाशती रहीं, जहां उन्होंने अपना सामान रखा था।
इसी दौरान उनकी मुलाकात मनोज उपाध्याय, संजय शर्मा और प्रशांत तिवारी से हुई। तीनों ने उनकी परेशानी को समझते हुए मदद शुरू की। आसपास की दुकानों में सामान तलाशने के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन से भी संपर्क किया गया, लेकिन पहले दिन सामान का पता नहीं चल सका।
नन्ही के पास रात में ठहरने की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में उनके रुकने की व्यवस्था भी की गई।
राजवीर सिंह को दी गई मामले की जानकारी
मामले की जानकारी प्रशांत तिवारी ने एटा से भाजपा सांसद प्रत्याशी रहे राजवीर सिंह को दी। उन्होंने भी नन्ही की हरसंभव मदद का आश्वासन दिया और इस मानवीय पहल की सराहना की।
उधर, गांधी नगर थाना अध्यक्ष राज कुमार और उनकी टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सामान की तलाश के प्रयास जारी रखे। टीम में विशेष रूप से विकास यादव, वीरेंद्र सिंह और अन्य सहयोगियों ने नन्ही की मदद के लिए संवेदनशीलता के साथ काम किया।
दूसरे दिन मिली सामान से भरी बैग
दूसरे दिन सुबह करीब सात बजे पुलिस और मददगारों ने नन्ही को उन्हीं गलियों और दुकानों में दोबारा ले जाकर तलाश शुरू की, जहां उन्होंने पिछली सुबह खरीदारी की थी।
लगातार प्रयास के बाद आखिरकार नन्ही का बैग और खरीदा हुआ सामान मिल गया। संबंधित दुकानदार ने सामान को सुरक्षित संभालकर रखा था और नन्ही के वापस आने का इंतजार कर रहा था।
बेटी की शादी के लिए व्यापारियों ने दिया अतिरिक्त सामान
सामान मिलने के बाद भी मदद का सिलसिला यहीं नहीं रुका। गांधी नगर के व्यापारियों मनोज उपाध्याय, संजय शर्मा, प्रशांत गोयल, गोविंद सिंघल, दीपक गुप्ता, अंकुर छतवाल, अंकित गुप्ता, ओम प्रकाश, संजय सक्सेना सहित अन्य लोगों ने प्रशांत तिवारी की अगुवाई में नन्ही को उनके खरीदे हुए सामान के साथ अतिरिक्त सामान भी भेंट किया।
बताया गया कि करीब दो महीने बाद नन्ही की बेटी की शादी होनी है। व्यापारियों ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए अपनी ओर से सहयोग किया, ताकि नन्ही अपने घर लौटकर परिवार का पालन-पोषण करने के साथ बेटी की शादी की जिम्मेदारी भी निभा सकें।
पुलिस ने सुरक्षित बस में बैठाकर किया विदा
दो दिनों तक दिल्ली जैसे अनजान शहर में परेशान रहीं नन्ही को आखिरकार गांधी नगर थाना अध्यक्ष राज कुमार ने सभी सहयोगियों के साथ मिलकर उनके शहर वापस जाने वाली बस में सुरक्षित बैठाया।
उन्हें बड़े भाई की तरह भरोसा और सहयोग देते हुए विदा किया गया।
नन्ही की हिम्मत और समाज की संवेदनशीलता बनी मिसाल
यह घटना केवल खोए हुए सामान के मिलने की कहानी नहीं है। यह एक ऐसी महिला की हिम्मत की कहानी है, जिसने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी।
यह उन लोगों की मानवता की कहानी भी है, जिन्होंने एक अनजान महिला की परेशानी को अपनी परेशानी समझा। साथ ही, यह गांधी नगर के व्यापारियों की सहृदयता और पुलिस प्रशासन की संवेदनशील भूमिका को भी सामने लाती है।
नन्ही ने हार नहीं मानी और इंसानियत ने भी उनका साथ नहीं छोड़ा।
मुश्किल समय में यदि इंसान दूसरे इंसान के साथ खड़ा हो जाए तो बड़ी से बड़ी परेशानी भी छोटी पड़ सकती है। गांधी नगर की यह घटना समाज में संवेदना, सहयोग और मानवता के बने रहने का संदेश देती है।





















