सत्यम् लाइव, 18 अप्रैल 2020, दिल्ली।। पूर्व प्राप्त सूचनाओं के अनुुुुुसार के अनुसार लॉकडाउन में जो छूट की बात कही गयी थी वो अब प्रारम्भ होने में मात्र दो दिन ही शेष हैंं। विश्व स्वास्थ संगठन के विशेष दूत डेविड नाबरो ने कहा कि दूसरे चरण में बीमारी को रोकने के लिये प्रयास के साथ साथ ये भी याद रखना चाहिए कि व्यक्ति की जीविका भी सुनिश्चित हो ताकि लोग आर्थिक मन्दी से न गुजरें इस कारण से कुछ आवश्यक उत्पादन प्रारम्भ कराने होगें, लेकिन जो लॉकडाउन का उल्लघंन करे उसे सजा भी जरूरी होगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जीवन का जो फार्मूला बताया है उस पर नोबेरो ने कहा कि सरकार को जीवन, आजीविका और जीने के तरीके पर भी ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है। ये याद रखना होगा कि दुनिया को चलाने के लिये जान भी और जहान भी। इसी बात को आपने कई लोगों के मुख से सुना होगा। यही बात आपने पीएम मोदी जी ने भी कही है कि जान भी और जहान भी। इसका अर्थ यह है कि आपका जिन्दा रहना भी आवश्यक है जिसके लिये रोटी का निवाला चाहिए और रोटी के लिये कुछ काम भी करना ही पडेगा।
डेविड नाबरो
लॉकडाउन का अगला चरण
लॉकडाउन का द्वितीय चरण में ये निश्चित किया जाना था कि संक्रमण क्षेत्र को परखा जाये। इस विषय पर नाबरो ने कहा कि इस लॉकडाउन को पहले से अधिक सख्त बनाते हुए उस पर अधिक ध्यान केन्द्रित करना होगा और आंकडे जुटाने होगें। इस पर पीएम मोदी जी ने 14 अप्रैल के बाद भी बढेगा, क्योंकि अधिकतर राज्य यही चाहते हैं। संक्रमण न होने वाले क्षेत्र 20 अप्रैल से उत्पादन कुछ चुने हुए क्षेत्रों में किया जा सकता है शेेष जो क्षेेत्र संक्रमित हैंं वहॉ पर सख्ती से लॉकडाउन का पालन किया जायेगा। दिल्ली एनसीआर में बहुत सारे संक्रमण जोन हैं तो सख्ती रहेगी।
भविष्य में वापस आ सकता है वायरस
विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष दूत ने भारतवासी की प्रशांसा करते हुए नाबरो ने कहा कि ”हम सब भारतवासी द्वारा की गयी कार्यवाही का पूरा समर्थन कहते हैं और उनके अद्भूूूत साहस की सराहना करते हैं जिस साहस के साथ आपने लॉकडाउन का सामना किया है उसकी पूरी जानकारी मेेेेरे पास तो नहीं है पर ये अवश्य कहा जा सकता है कि लॉकडाउन के सहारे ही नोवेल कोरोना को हराया जा सकता है। अर्थात् ये वायरस अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है पुन: आ सकता है क्या? क्या हम सबको लॉकडाउन के लिये तैयार रहना होगा ? इस प्रश्न का उत्तर भविष्य में ही मिलेगा। वशर्ते आप सबको सदैव अपनी अन्दरूनी शक्ति बढाने में लग जाना चाहिए। अब तो ऑन लाइन प्रारम्भ होने पर बहुत से लोग स्वार्थ भारत में आपकी सेवा को तैयार हो जायेगें। बस आपको इतना तो ज्ञान होना ही चाहिए कि सामने वाला इतना सच बोल रहा है।
उपसम्पादक सुनील शुक्ल





















