नई दिल्ली, 25 अक्तूबर:
केंद्र सरकार ने देशभर के टोल प्लाजाओं पर डायनेमिक क्यूआर कोड टोल सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। इस कदम से बिना फास्टैग वाहनों से अवैध नकद वसूली पर पूरी तरह रोक लगेगी और टोल टैक्स की राशि ऑटोमैटिक रूप से सरकार व टोल कंपनी के खातों में जमा होगी।
यूपीआई आधारित डिजिटल टोल भुगतान
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 15 अक्तूबर को यूपीआई आधारित टोल भुगतान प्रणाली के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।
इसके तहत देशभर के 1150 टोल प्लाजा पर 18 इंच की एलईडी स्क्रीन लगाई जा रही हैं, जिन पर डायनेमिक क्यूआर कोड प्रदर्शित होगा।
बिना फास्टैग वाले वाहन चालक इन कोड्स को स्कैन कर यूपीआई से टोल शुल्क का भुगतान कर सकेंगे। यह कार्य 31 अक्तूबर तक पूरा कर लिया जाएगा।
हर ट्रांजेक्शन का यूनिक रिकॉर्ड और रियल-टाइम प्रोसेसिंग
अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक भुगतान के लिए यूनिक क्यूआर कोड जेनरेट होगा, जिससे टोल शुल्क की सटीक जानकारी प्रदर्शित होगी।
इससे टोल ऑपरेटरों द्वारा अधिक वसूली या हेरफेर की संभावना समाप्त हो जाएगी।
सभी भुगतान रियल-टाइम में सुरक्षित रूप से प्रोसेस होंगे।
एनएचएआई और एजेंसियों के बीच ऑटोमैटिक राजस्व वितरण
सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता है कि राजस्व का ऑटोमैटिक बंटवारा होगा।
एक्वायरर बैंक के माध्यम से एकत्र की गई टोल राशि सीधे एनएचएआई और टोल एजेंसी के खातों में जमा होगी।
इससे टैक्स लीकेज और मानवीय हस्तक्षेप पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता और दक्षता
अधिकारियों का कहना है कि डायनेमिक क्यूआर कोड सिस्टम से टोल वसूली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
यह प्रणाली डिजिटल इंडिया मिशन को बढ़ावा देते हुए कैश ट्रांजेक्शन को कम करेगी और सड़क उपयोगकर्ताओं के अनुभव को बेहतर बनाएगी।
नकद वसूली में हेराफेरी पर अंकुश
विशेषज्ञों के अनुसार, नकद भुगतान प्रणाली से टोल कर्मियों को राजस्व में गड़बड़ी करने का अवसर मिलता है।
कुछ कर्मचारी अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग कर लेनदेन को एनएचएआई के आधिकारिक सिस्टम से छुपाते हैं या उन्हें ब्लैकलिस्टेड फास्टैग श्रेणी में दिखाते हैं।
नया सिस्टम इन सभी अनियमितताओं पर लगाम लगाने में मदद करेगा।
15 नवंबर से यूपीआई से भुगतान पर छूट, नकद पर जुर्माना जारी
सरकार ने घोषणा की है कि 15 नवंबर से बिना फास्टैग वाले वाहन चालक यूपीआई से टोल का 1.25 गुना शुल्क (₹125) अदा कर सकेंगे,
जबकि नकद भुगतान करने वालों को मौजूदा नियम के अनुसार दोगुना शुल्क (₹200) देना जारी रहेगा।
यह कदम डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में अहम साबित होगा।





















