विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु संबंधी चुनौतियों के बीच ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है और इनका सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ रहा है।
81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित ‘ग्लोबल साउथ’ देशों की बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया में टकराव बढ़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ रहा है। निवेश के प्रवाह में असंतुलन, बढ़ता कर्ज और विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी भी बड़ी चिंताओं में शामिल हैं।
वैश्विक फैसलों में ग्लोबल साउथ की भागीदारी जरूरी
विदेश मंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश आज कई वैश्विक संकटों के केंद्र में हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैसले लेने वाली संस्थाओं में उनकी भूमिका अभी भी सीमित है।
जयशंकर ने कहा, “आज वैश्विक संकट में ग्लोबल साउथ भले ही सबसे आगे हो, लेकिन निर्णय लेने में वह सबसे पीछे है।”
उन्होंने कहा कि जिन वैश्विक संस्थाओं और व्यवस्थाओं का निर्माण एक अलग दौर की परिस्थितियों में हुआ था, वे आज भी उसी समय की शक्ति संरचना को प्रतिबिंबित करती हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच इन संस्थाओं में सुधार और अधिक प्रतिनिधित्व की जरूरत है।
जयशंकर के मुताबिक ग्लोबल साउथ के देशों को उन निर्णय लेने वाले ढांचों का हिस्सा बनना चाहिए, जहां उनके भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और फैसले होते हैं।
व्यापार और सप्लाई चेन पर बढ़ता दबाव
विदेश मंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। सप्लाई चेन में व्यवधान और निवेश के बदलते रुझान विकासशील देशों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने कर्ज के बढ़ते जोखिम का भी उल्लेख किया। कई विकासशील देशों के सामने विकास योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्त जुटाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में विकासशील देशों की जरूरतों को अधिक प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
तेल की कीमतों पर मनमानी नहीं होनी चाहिए
जयशंकर ने ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तेल की कीमतों के मामले में मनमानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव का सीधा असर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और उनकी विकास योजनाओं पर पड़ता है।
ऊर्जा सुरक्षा को वैश्विक आर्थिक स्थिरता से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भरोसेमंद और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है।
जलवायु संकट और विकास की चुनौती
विदेश मंत्री ने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। विकासशील देशों के लिए जलवायु संकट से निपटने के साथ-साथ आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर विकास और जलवायु संबंधी लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने के लिए विकासशील देशों को पर्याप्त संसाधन और वित्तीय सहयोग मिलना जरूरी है।
मिलकर आवाज उठाने की जरूरत
जयशंकर ने ग्लोबल साउथ के देशों से साझा चुनौतियों पर मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में प्रभावी भूमिका हासिल करने के लिए इन देशों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग आवश्यक है।
उनके संबोधन में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और विकास के मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलती दुनिया में वैश्विक संस्थाओं को भी बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।





















