सत्यम् लाइव, 27 जुलाई, 2021, दिल्ली।। 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोटी गाँव रामेश्वरम, तमिलनाडु में एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में जन्में बालक जिसके पिता जैनुलाब्दीन था। मछुआरों को नाव किराये पर देने वाले पिता ने अपने पुत्र को अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम का नाम दिया। पाँच भाई एवं पाँच बहनों कें बीच पहली बार पाँच वर्ष की अवस्था में, रामेश्वरम की प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा लेना प्रारम्भ किया। उड़ते हुए पक्षियों को देखकर मन में विमान की जिज्ञासा कहीं बैठ चुकी थी। कलाम जी ने वैदिक गणित को को समझने के लिये प्रातः 4 बजे पढ़ने जाते थे।
प्रारंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बार वितरित करने का कार्य भी किया था। कलाम ने 1950 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया। 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में कार्य किया। परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे जुलाई 1982 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था।
अग्नि मिसाइल और पृथ्वी मिसाइल का सफल परीक्षण का श्रेय भी कलाम को ही प्राप्त है। जुलाई 1992 भारतीय रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त किये गये फिर उनकी देखरेख में ही 1998 में पोखरण परिक्षण करके भारत को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल करा दिया। 18 जुलाई 2002 को कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा भारत का राष्ट्रपति चुना गया। 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई।
व्यक्तिगत जीवन में अनुशासनप्रिय तथा सम्पूर्ण शाकाहारी कलाम जी के सामने, श्रीराम की बात होते ही अपना गॉव याद आ जाता था और कई व्याख्यानों में उन्होंने श्रीराम की जीवनी सुनाते हुए, अपने गॉव सहित रामेश्वरम् का वर्णन भी किया। श्रीराम के समय काल पर भी कई बार अपना मत प्रस्तुत किया।
27 जुलाई 2015 की शाम अब्दुल कलाम जी भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में एक व्याख्यान दे रहे थे तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वे वहीं बेहोश होकर गिर पड़े। सायं 6.30 बजे बेथानी अस्पताल में आईसीयू में ले जाया गया और दो घंटे के बाद इनकी मृत्यु की पुष्टि कर दी गई। ऐसे कलाम को बारम्बार सलाम है।
सुनील शुक्ल





















