सत्यम् लाइव, खोड़ा, गाजियाबाद | गाजियाबाद के खोड़ा स्थित वार्ड नंबर 23, हिमालय एंक्लेव के प्राचीन शिव शक्ति दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास संत श्री श्यामदास जी महाराज ने भगवान के विभिन्न दिव्य अवतारों और श्रीकृष्ण जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में झूमते हुए नृत्य करने लगे।
प्राचीन शिव शक्ति दुर्गा मंदिर ट्रस्ट, हिमालय एंक्लेव के मीडिया प्रभारी पंडित संतोष मिश्रा ने बताया कि कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को कपिल अवतार, भगवान वामन और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अवतारों की कथा सुनाई गई। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
‘नंद घर आनंद भयो’ के जयकारों से गूंजा कथा पंडाल
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही कथा पंडाल में उत्साह और उल्लास का वातावरण छा गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ जयकारे लगाए—
“नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की। हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की॥”
इन भक्तिमय जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में नृत्य करते हुए अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट की। पूरे वातावरण में आस्था, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम देखने को मिला।

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से संस्कार और विनम्रता की सीख
कथा व्यास संत श्री श्यामदास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को भगवान श्रीकृष्ण से संस्कार, विनम्रता और माता-पिता के प्रति सम्मान की सीख लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण परमात्मा के स्वरूप होते हुए भी अपने माता-पिता के चरणों में प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे।
महाराज श्री ने कहा कि महानता का वास्तविक आधार अहंकार नहीं, बल्कि विनम्रता, संस्कार और बड़ों के प्रति सम्मान है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलने, सदाचार अपनाने और अपने जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के महत्व को समझाते हुए कहा कि जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना और अपने कर्तव्यों का पालन करना आवश्यक है।
जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब प्रभु लेते हैं अवतार
भगवान के विभिन्न अवतारों की महत्ता बताते हुए संत श्री श्यामदास जी महाराज ने कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार, दुराचार और पापाचार बढ़ता है तथा धर्म की हानि होती है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।
इस प्रसंग में उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई का उल्लेख किया—
“जब-जब होइ धरम की हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी॥ तब-तब धरि प्रभु विविध शरीरा। हरहिं दयानिधि सज्जन पीरा॥”
महाराज श्री ने बताया कि जब मथुरा के राजा कंस के अत्याचार बढ़ गए, तब भगवान श्रीहरि विष्णु ने देवकी माता के आठवें पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। इसी प्रकार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों से संसार को मुक्ति दिलाने और धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीराम ने अवतार धारण किया।
इन दिव्य प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि सत्य, धर्म और सदाचार का मार्ग ही मानव जीवन का वास्तविक मार्ग है।

माखन चोरी की लीला में छिपा आध्यात्मिक संदेश
कथा व्यास जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए माखन चोरी की लीला का आध्यात्मिक अर्थ भी समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली शिक्षाएं भी हैं।
उन्होंने समझाया कि माखन सार तत्व का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण की यह लीला मनुष्य को जीवन के वास्तविक सार को पहचानने की प्रेरणा देती है। संसार के नश्वर भोग-विलास में अपना समय और सामर्थ्य व्यर्थ करने के बजाय अपने भीतर स्थित परमात्मा को जानने और प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसी मार्ग से जीवन का वास्तविक कल्याण संभव है।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा ही नहीं, बल्कि जगद्गुरु भी थे। उन्होंने अपने सखाओं को आत्मिक जागरण, प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक जीवन का संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को कर्तव्यनिष्ठा, प्रेम, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मुख्य यजमान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित
इस धार्मिक आयोजन में मुख्य यजमान श्रीमती सुमन मिश्रा एवं पंडित श्री शेषनारायण मिश्रा सहित मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री विनोद तिवारी, श्री विनोद कुमार नागर, श्री तेजपाल गुप्ता, श्री हरिश्चंद्र शर्मा, श्री परमात्मा यादव, श्री सूरज सिंह कुशवाह, श्री कृष्ण स्वरूप वर्मा, श्री संदीप मिश्रा, श्री हृदयराम मिश्रा, श्री डी.पी. उपाध्याय, श्री सत्यनारायण गुप्ता, पंडित संतोष मिश्रा, श्री संतोष वर्मा, श्री नारायण सिंह कुशवाह, श्री घनश्याम तिवारी, श्री रामअनुज मिश्रा, श्री रामजी यादव, श्री मनमोहन तिवारी, श्री मनोज चौहान, श्री दिलीप सिंह कुशवाह, श्री लोकेंदर सिंह, श्री उपेंद्र मिश्रा, श्री ओम प्रकाश तिवारी, श्री अवधेश सिंह, श्री कमलेश नारायण मिश्रा, श्री जंगबीर सिंह, श्री संतोष अग्रवाल, श्री समरपाल सिंह, श्री शिवराम सिंह, श्री शंकर पटेल, श्री सुधांशु, श्री दीपांशु, श्री ईशु, श्री अनुराग और श्री डब्बू सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को संस्कार, विनम्रता, सदाचार, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
जय श्रीमद्भागवत! जय श्रीहरि! जय श्रीकृष्ण!






















